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Showing posts from February, 2024

शिव भक्ति विनय पत्रिका

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TransLiteral Foundations A Nonprofit Public Service Initiative. Literature Ancestry Dictionary Prashna Search हिंदी सूची | हिंदी साहित्य | पुस्तक | विनय पत्रिका |     शिव स्तुति ९   विनय पत्रिका - शिव स्तुति ९ विनय पत्रिकामे, भगवान् श्रीराम के अनन्य भक्त तुलसीदास भगवान् की भक्तवत्सलता व दयालुता का दर्शन करा रहे हैं। Tags  :  tulsidas vinay patrika तुलसीदास विनय पत्रिका भैरवरुप शिव - स्तुति Translation - भाषांतर देव, भीषणाकार, भैरव, भयंकर, भूत - प्रेत - प्रमथाधिपति, विपति - हर्ता । मोह - मूषक - मार्जार, संसार - भय - हरण, तारण - तरण, अभय कर्ता ॥१॥ अतुल बल, विपुल विस्तार, विग्रह गौर, अमल अति धवल धरणीधराभं । शिरसि संकुलित - कल - जूट पिंगलजटा, पटल शत - कोटि - विद्युच्छटाभं ॥२॥ भ्राज विबुधापगा आप पावन परम, मौलि - मालेव शोभा विचित्रं । ललित लल्लाटपर राज रजनीशकल, कलाधर, नौमि हर धनद - मित्रं ॥३॥ इंदु - पावक - भानु - नयन, मर्दन - मयन, गुण - अयन, ज्ञान - विज्ञान - रुपं । रमण - गिरिजा, भवन भूधराधिप सदा, श्रवण कुंडल, वदनछवि अनूपं ॥४॥ चर्म - असि - शूल - धर, डमरु - शर - चाप - ...

पूरकनाम राम सुख रासी। मनुजचरित कर अज अबिनासी॥

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पूरकनाम राम सुख रासी। मनुजचरित कर अज अबिनासी॥ आगें परा गीधपति देखा। सुमिरत राम चरन जिन्ह रेखा॥ पूर्णकाम, आनंद की राशि, अजन्मा और अविनाशी श्री रामजी मनुष्यों के चरित्र कर रहे हैं। आगे (जाने पर) उन्होंने गृध्रपति जटायु को पड़ा देखा। वह श्री रामचंद्रजी के चरणों का स्मरण कर रहा था, जिनमें (ध्वजा, कुलिश आदि की) रेखाएँ (चिह्न) हैं॥

स्वस्तिक से घर का नक्सा

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https://youtu.be/hMLRUzkMJ5Y?si=s3IlxkjrUmxFAH5c swastik start from north

राम को भजो

 अध्याय: १८, श्र्लोक: ०२ श्रीभगवानुवाच | काम्यानां कर्मणां न्यासं सन्न्यासं कवयो विदु: | सर्वकर्मफलत्यागं प्राहुस्त्यागं विचक्षणा: || परम भगवान ने कहाः कामना से अभिप्रेरित कर्मों के परित्याग को विद्वान लोग 'संन्यास' कहते हैं और सभी कर्मों के फलों के त्याग को बुद्धिमान लोग त्याग कहते हैं। काल कराल ब्याल खगराजहि। नमत राम अकाम ममता जहि॥ लोभ मोह मृगजूथ किरातहि। मनसिज करि हरि जन सुखदातहि॥ कालरूपी भयानक सर्प के भक्षण करने वाले श्री राम रूप गरुड़जी को भजो। निष्कामभाव से प्रणाम करते ही ममता का नाश कर देने वाले श्री रामजी को भजो। लोभ-मोह रूपी हरिनों के समूह के नाश करने वाले श्री राम किरात को भजो। कामदेव रूपी हाथी के लिए सिंह रूप तथा सेवकों को सुख देने वाले श्री राम को भजो॥

Don't have japa mala? Not to worry, here is a way to chant mantras using your fingertips. Using this method you can chant any mantra associated with any male deity.

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कौन सी धातु के बर्तन में भोजन करने से क्या क्या लाभ और हानि होती है?

कौन सी धातु के बर्तन में भोजन करने से क्या क्या लाभ और हानि होती है? सोना :- सोना एक गर्म धातु है। सोने से बने पात्र में भोजन बनाने और करने से शरीर के आन्तरिक और बाहरी दोनों हिस्से कठोर, बलवान, ताकतवर और मजबूत बनते है और साथ साथ सोना आँखों की रौशनी बढ़ता है। चाँदी :- चाँदी एक ठंडी धातु है, जो शरीर को आंतरिक ठंडक पहुंचाती है। शरीर को शांत रखती है इसके पात्र में भोजन बनाने और करने से दिमाग तेज होता है, आँखों स्वस्थ रहती है, आँखों की रौशनी बढती है और इसके अलावा पित्तदोष, कफ और वायुदोष को नियंत्रित रहता है। कांसा :- काँसे के बर्तन में खाना खाने से बुद्धि तेज होती है, रक्त में शुद्धता आती है, रक्तपित शांत रहता है और भूख बढ़ाती है। लेकिन काँसे के बर्तन में खट्टी चीजे नहीं परोसनी चाहिए खट्टी चीजे इस धातु से क्रिया करके विषैली हो जाती है जो नुकसान देती है। कांसे के बर्तन में खाना बनाने से केवल ३ प्रतिशत ही पोषक तत्व नष्ट होते हैं। तांबा :- तांबे के बर्तन में रखा पानी पीने से व्यक्ति रोग मुक्त बनता है, रक्त शुद्ध होता है, स्मरण-शक्ति अच्छी होती है, लीवर संबंधी समस्या दूर होती है, तांबे ...