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सुगमाता से भगवत प्राप्ति

सत्य वचन, आधीनता, पर तिय मातु समान।  इतने पर हरि ना मिले, तो तुलसीदास जमान।।    जमानत दी तुलसीदास जी ने -  सत्य वचन - झूठ न बोलता हो।  आधीनता - गुरु, ग्रन्थ और गोविन्द का अनुशासन मानता हो, उनके अनुगत हो।  पर तिय मातु समान - पराई स्त्री में मातृ बुद्धि हो।  अगर ये तीन साधन जीवन में हैं, तो तुलसीदास जी कहते हैं - मैं जमानत देता हूँ, अर्थात् मिले बिना नहीं रह सकते।   तुलसीदास जी ने यह भी कहा है -   बिगरी जन्म अनेक की सुधरे अबही आजु । होहि राम कौ नाम जपु तुलसी तजि कुसमाजु।।    अनेकों जन्म से बात बिगड़ गई है लेकिन बिगड़ी हुई बात भी आज ही और अभी बन सकती है। बहुत सुगम साधन बताया - राम जी का होकर राम जी का नाम लो। होय राम कौ… राम जी के होकर, राम जी से सम्बन्ध स्थापित करें। माता, पिता, सखा… इस प्रकार से सम्बन्ध स्थापित करके, रामजी का होकर, राम जी को अपना इष्ट समझ कर…. यानि भगवान् के आश्रित होकर भगवान् का नाम लें।

। श्री राजराजेश्वरी अष्टकम्

http://reveredhinduism.blogspot.com/2017/08/shri-rajarajeshwari-ashtakam.https http://reveredhinduism.blogspot.com/2017/08/shri-rajarajeshwari-ashtakam.https   ।। श्री राजराजेश्वरी अष्टकम् ।। अम्बा शाँभवि चन्द्रमौलि रमलाऽपर्णा उमा पार्वती ।                              काली हैमवती शिवा त्रिनयनी   कात्यायनी भैरवी । सावित्री नवयौवना शुभकरी   साम्राज्य लक्ष्मीप्रदा ।                              चिद्रूपी      परदेवता    भगवती   श्री   राजराजेश्वरी ।। १ ।। अम्बा मोहिनी देवता त्रिभुवनी आनन्द सन्दायिनी ।                              वाणी पल्लव पाणि वेणु मुरली गानप्रिया लोलिनी । कल्याणी   उडुराजबिंब   वदना  धूम्राक्ष संहारिणी ।              ...