सुगमाता से भगवत प्राप्ति
सत्य वचन, आधीनता, पर तिय मातु समान। इतने पर हरि ना मिले, तो तुलसीदास जमान।। जमानत दी तुलसीदास जी ने - सत्य वचन - झूठ न बोलता हो। आधीनता - गुरु, ग्रन्थ और गोविन्द का अनुशासन मानता हो, उनके अनुगत हो। पर तिय मातु समान - पराई स्त्री में मातृ बुद्धि हो। अगर ये तीन साधन जीवन में हैं, तो तुलसीदास जी कहते हैं - मैं जमानत देता हूँ, अर्थात् मिले बिना नहीं रह सकते। तुलसीदास जी ने यह भी कहा है - बिगरी जन्म अनेक की सुधरे अबही आजु । होहि राम कौ नाम जपु तुलसी तजि कुसमाजु।। अनेकों जन्म से बात बिगड़ गई है लेकिन बिगड़ी हुई बात भी आज ही और अभी बन सकती है। बहुत सुगम साधन बताया - राम जी का होकर राम जी का नाम लो। होय राम कौ… राम जी के होकर, राम जी से सम्बन्ध स्थापित करें। माता, पिता, सखा… इस प्रकार से सम्बन्ध स्थापित करके, रामजी का होकर, राम जी को अपना इष्ट समझ कर…. यानि भगवान् के आश्रित होकर भगवान् का नाम लें।