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Showing posts from May, 2023

नेत्र रोगों और चश्मे के बढ़ते नंबर को रोकने का अद्भुत और चमत्कारिक उपाय

🔴Astrology &Remedies🔴 Improve Eye health and Vision चाक्षुसी विद्या- नेत्र रोगों और चश्मे के बढ़ते नंबर को रोकने का अद्भुत और चमत्कारिक उपाय ज्योतिष दृष्टि से देखा जाए तो सूर्य, चंद्र, द्वितीय व द्वादश भाव, और इनके स्वामियों की स्थिति आदि से कुण्डली में नेत्र विकार देखे जाते हैं। नेत्र विकारों में सबसे अधिक देखा जाता है नेत्र ज्योति का कम होना, आजकल तो छोटे छोटे बच्चे भी भारी भरकम नंबर का चश्मा लगाए नज़र आते हैं। आज का ये विशेष प्रयोग नेत्र ज्योति को बढ़ाने और नेत्रों के अन्य रोगों के निवारण से संबंधित है। कृष्णयजुर्वेदीय चक्षुषोपनिषद /चाक्षुषी विद्या का प्रयोग बताया गया है जिसके निरंतर प्रयोग से नेत्र रोगों साथ ही चश्मे के नंबर में भी सुधार देखा गया है। 25 जून को शुक्लपक्षीय रविवारीय सप्तमी है जिसे विजया सप्तमी भी कहते हैं आप इस दिन से शुरू करके नित्य चक्षुषोपनिषद का पाठ और इससे अभिमंत्रित जल लें, मैने अपने अनुभव में पाया है कि नित्य चाक्षुषी विद्या से अभिमंत्रित करके अगर एक छोटी आधाचम्मच/आवश्यकता अनुसार त्रिफलादि घृत लिया जाता है तो चश्मे के नंबर में सुधार और आँखों से संबंधित अ...

असली सुख

https://youtu.be/4cixmNIh8Sc

तुलसी जी , पौधा नहीं जीवन का अंग है

𝘄𝗵𝘆 𝗵𝗶𝗻𝗱𝘂𝘀 𝗽𝗲𝗿𝗳𝗼𝗿𝗺 𝘁𝘂𝗹𝘀𝗶 𝗽𝗼𝗼𝗷𝗮? तुलसी जी , पौधा नहीं जीवन का अंग है #thread किस बातों का तुलसी पूजन में ध्यान रखा जाये?  1. तुलसी जी को नाखूनों से कभी नहीं तोडना चाहिए,। 2.सांयकाल के बाद तुलसी जी को स्पर्श भी नहीं करना चाहिए । 3. रविवार को तुलसी पत्र नहीं तोड़ने चाहिए । 4. जो स्त्री तुलसी जी की पूजा करती है। उनका सौभाग्य अखण्ड रहता है । उनके घर सुख शांति व समृद्धि का वास रहता है  5. द्वादशी के दिन तुलसी को नहीं तोडना चाहिए  6. सांयकाल के बाद तुलसी जी लीला करने जाती है। 7. तुलसी जी वृक्ष नहीं है! साक्षात् राधा जी का स्वरूप  है । 8. तुलसी के पत्तो को कभी  चबाना नहीं चाहिए। तुलसी के पौधे का महत्व धर्मशास्त्रों में भी बखूबी बताया गया है. तुलसी के पौधे को माता लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है.। हिंदू धर्म में तुलसी के पौधे से कई आध्यात्मिक बातें जुड़ी हैं.। शास्त्रीय मान्यता के अनुसार भगवान विष्णु को तुसली अत्यधिक प्रिय है.। तुलसी के पत्तों के बिना भगवान विष्णु की पूजा अधूरी मानी जाती है क्योंकि भगवान विष्णु का प्रसाद बिना तुलसी दल के पूर्ण नह...

तिथि अनुसार भोजन

तिथि अनुसार भोजन   #thread  प्रतिपदा को कूष्माण्ड(कुम्हड़ा, पेठा) न खाये, क्योंकि यह धन का नाश करने वाला है। द्वितीया को बृहती (p बैंगन या कटेहरी(कटहल )) खाना निषिद्ध है। तृतीया को परवल खाना शत्रुओं की वृद्धि करने वाला है। चतुर्थी को मूली खाने से धन का नाश होता है। पंचमी को बेल खाने से कलंक लगता है। षष्ठी को नीम की पत्ती, फल या दातुन मुँह में डालने से नीच योनियों की प्राप्ति होती है। सप्तमी को ताड़ का फल खाने से रोग बढ़ता है था शरीर का नाश होता है। अष्टमी को नारियल का फल खाने से बुद्धि का नाश होता है। नवमी को लौकी खाना गोमांस के समान है। एकादशी को शिम्बी(सेम), द्वादशी को पूतिका(पोई) अथवा त्रयोदशी को बैंगन खाने से पुत्र का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड 27.29-34) अमावस्या, पूर्णिमा, संक्रान्ति, चतुर्दशी और अष्टमी तिथि, दशमी एकादशी और द्वादशी, रविवार, श्राद्ध और व्रत के दिन स्त्री-सहवास तथा तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण,ब्रह्म खंड 27.29-38) रविवार के दिन मसूर की दाल, अदरक और लाल रंग का साग नहीं खाना चाहिए। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, श्रीकृ...

भगवान सबको मिलेगे

https://youtu.be/jG9MzF4aP5w भगवान को अपना मान लो

रामजी का अजेय धर्मरथ (व्याख्या)

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नाथ न रथ नहिं तन पद त्राना। केहि बिधि जितब बीर बलवाना।। सुनहु सखा कह कृपानिधाना। जेहिं जय होइ सो स्यंदन आना।। विभिशण ने रामजी से कहा, हे नाथ! आपके न रथ है, न तन की रक्षा करने वाला कवच है, न जूते ही हैं। वह बलवान् वीर रावण किस प्रकार जीता जाएगा? कृपानिधान श्री रामजी ने कहा- हे सखे! सुनो, जिससे सर्वदा विजय होती है, वह रथ तो दूसरा ही होता है॥ सौरज धीरज तेहि रथ चाका। सत्य सील दृढ़ ध्वजा पताका॥ बल बिबेक दम परहित घोरे। छमा कृपा समता रजु जोरे॥ शौर्य और धैर्य उस रथ के पहिए हैं। सत्य और शील (सदाचार) उसकी मजबूत ध्वजा और पताका हैं। बल, विवेक, दम (इंद्रियों का वश में होना) और परोपकार- ये चार उसके घोड़े हैं, जो क्षमा, दया और समता रूपी डोरी से रथ में जोड़े हुए हैं॥ ईस भजनु सारथी सुजाना। बिरति चर्म संतोष कृपाना॥ दान परसु बुधि सक्ति प्रचंडा। बर बिग्यान कठिन कोदंडा॥ ईश्वर का भजन ही (उस रथ को चलाने वाला) चतुर सारथी है। वैराग्य ढाल है और संतोष तलवार है। दान फरसा है, बुद्धि प्रचण्ड शक्ति है, श्रेष्ठ विज्ञान कठिन धनुष है॥ अमल अचल मन त्रोन समाना। सम जम नियम सिलीमुख नाना॥ कवच अभेद बिप्र गुर पूजा।...

तत्व बोध कैसे हो।

https://youtu.be/vtDTTD3SleE https://hindi.webdunia.com/religion/religion/hindu/ramcharitmanas/UttarKand/9.htm

राम नाम जपने से दूर होती है एंग्जाइटी और कम होता है ब्लड प्रेशर, हर संकट का अंत इसमें है छुपा

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