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Showing posts from June, 2023

राम मन्त्र का अर्थ

राम मन्त्र का अर्थ........ र', 'अ' और 'म', इन तीनों अक्षरों के योग से 'राम' मंत्र बनता है। यही राम रसायन है। 'र' अग्निवाचक है। 'अ' बीज मंत्र है। 'म' का अर्थ है ज्ञान। यह मंत्र पापों को जलाता है, किंतु पुण्य को सुरक्षित रखता है और ज्ञान प्रदान करता है। हम चाहते हैं कि पुण्य सुरक्षित रहें, सिर्फ पापों का नाश हो। 'अ' मंत्र जोड़ देने से अग्नि केवल पाप कर्मो का दहन कर पाती है। और हमारे शुभ और सात्विक कर्मो को सुरक्षित करती है। 'म' का उच्चारण करने से ज्ञान की उत्पत्ति होती है। हमें अपने स्वरूप का भान हो जाता है। इसलिए हम र, अ और म को जोड़कर एक मंत्र बना लेते हैं-राम। 'म' अभीष्ट होने पर भी यदि हम 'र' और 'अ' का उच्चारण नहीं करेंगे तो अभीष्ट की प्राप्ति नहीं होगी। राम सिर्फ एक नाम नहीं अपितु एक मंत्र है, जिसका नित्य स्मरण करने से सभी दु:खों से मुक्ति मिल जाती है। राम शब्द का अर्थ है- मनोहर, विलक्षण, चमत्कारी, पापियों का नाश करने वाला व भवसागर से मुक्त करने वाला। रामचरित मानस के बालकांड में एक प्रसंग में ...

aim of life

https://youtu.be/8N8m2MkCCtg

naam jap aur seva

https://youtu.be/F7vmVEeblVw

श्री पंचमुखी गणेश जी अलौकिक महात्म्य

श्री पंचमुखी गणेश जी अलौकिक महात्म्य ❣️ आपने पंच मुखी हनुमानजी की तरह आपने पंचमुखी गणेशजी की भी प्रतिमाएं देखी होगी।  क्या आप जानते है क्या है इनका अर्थ ?  शुभ और मंगलमयी होते हैं पंचमुखी गणेश पांच मुख वाले गजानन को पंचमुखी गणेश कहा जाता है। पंच का अर्थ है पांच। मुखी का मतलब है मुंह। ये पांच पांच कोश के भी प्रतीक हैं।  वेद में सृष्टि की उत्पत्ति, विकास, विध्वंस और आत्मा की गति को पंचकोश के माध्यम से समझाया गया है। इन पंचकोश को पांच तरह का शरीर कहा गया है।  पहला कोश है अन्नमय कोश-संपूर्ण जड़ जगत जैसे धरती, तारे, ग्रह, नक्षत्र आदि; ये सब अन्नमय कोश कहलाता है।  दूसरा कोश है प्राणमय कोश-जड़ में प्राण आने से वायु तत्व धीरे-धीरे जागता है और उससे कई तरह के जीव प्रकट होते हैं। यही प्राणमय कोश कहलाता है।  तीसरा कोश है मनोमय कोश-प्राणियों में मन जाग्रत होता है और जिनमें मन अधिक जागता है वही मनुष्य बनता है।  चौथा कोश है विज्ञानमय कोश-सांसारिक माया भ्रम का ज्ञान जिसे प्राप्त हो। सत्य के मार्ग चलने वाली बोधि विज्ञानमय कोश में होता है। यह विवेकी मनुष्य को तभी अनुभूत...

श्री दुर्गा नाम महात्म्य

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Menu Search for National News - राष्ट्रीय अद्धयात्म दस्तक-विशेष फीचर्ड श्री दुर्गा नाम महात्म्य   Dastak Admin September 25, 2014  1,010  5 minutes read मनुष्य शक्तिशाली होने की महत्वाकांक्षा रखता है’ इसी सिद्धांत के अनुसार अपनी-अपनी अभिरुचि को लक्ष्य करके सभी प्रयत्न कर रहे हैं। जगत के जितने भी विचार प्रधान प्राणी हैं, उनमें यह अभिकांक्षा स्वाभाविक रूप से दृष्टिगोचर होती है। इसी के अनुसार इस विषय के तत्वज्ञ, ऋषि, मुनि, आचार्य, गुरु आदि महापुरुषों ने भिन्न-भिन्न पथ निर्दिष्ट करके जगत को उक्त आकांक्षा की सिद्धि के लिए अग्रसर किया है। चाहे वे सारे मार्ग ‘शाक्त’ नाम से अभिहित न हो तथा उस मार्ग के अनुयायी ऐसा करने में आनाकानी करें तथापि तत्वदृष्टि से वे सभी शाक्त ही हैं, क्योंकि वे अपनी अभिलषित वस्तु ‘शक्ति’ को चाहते हैं। ‘महत्ता’ पदार्थ और शक्ति दोनों अभिनाभाव सिद्ध हैं। अर्थात इन दोनों में अटूट एवं पूर्व संबंध हैं। यद्यपि जगत के सारे मार्ग तथा मनुष्य शाक्त ही हैं तथापि हमारे इस भारतवर्ष में यह शब्द एक विशिष्ट साधना पद्धित का वाचक है और उस पद्धति के अनुसार चलने वाले साधक को ...

श्री राम का चरित्र अनंत है

विभिन्न रामायण सारम्–  #thread श्री राम का चरित्र अनंत है  इस समस्त संसार में मर्यादा पुरषोत्तम के चरित्र का वर्णन इतना विशाल है कि वह एक ग्रंथ में समाहित नहीं हो सकता जैसा कि श्रीमद कौशिक रामायण में कहा गया है; अकूपारो यथा सिंधुश्चुलकीकर्तुमक्षमः ।  तथैव रामचरितं नैकस्मिन माति पुस्तके ॥ अतो हि बहवो ग्रन्था नानारामकथात्मकाः ।  नानात्वं दूषणं नास्ति भूषणं तद्धि सुव्रत ॥ परस्परविरोधोऽपि यो ग्रन्थेषु विलोक्यते ।  सोऽपि साधुसमाधेयः कल्पभेदोपलक्षितः ॥ कल्पे कल्पे भगवतो ह्यवतारा भवन्ति हि लीलावैविध्यमप्यस्मिन् नासम्भाव्यं हिपुत्रक॥ जिस प्रकार विशाल समुद्र को मुट्ठी भर में भरना असम्भव है, उसी प्रकार सम्पूर्ण रामचरित को एक ग्रंथ में लिखना असम्भव है। इसलिए भगवान राम की विभिन्न कहानियों वाली कई पुस्तकें हैं। यह विविधता कोई दोष नहीं बल्कि एक सौंदर्य है। रामायण के विभिन्न ग्रन्थों में जो विरोधाभास दिखाई देते हैं, वह भी कल्पभेद से भली-भाँति हल हो सकते हैं, क्योंकि प्रत्येक कल्प में भगवान के अवतार होते हैं, अतः हे पुत्र! अलग-अलग कल्पों में लीलाओं में कुछ भिन्नता होना असंभव नह...

संध्यावन्दनम्

PROLOGUE TO SANDHYAVANDANAM RITUALS OF HINDUS  संध्यावन्दनम्  (sandhyāvandanam) is a Nityakarma (daily ritual) prescribed by Hindu Sastras to all who have undergone Upanayana Samskaram and who are called Dwijas. It is Karmayoga, Bhaktiyoga and Jnaanayoga combined that unites the three paths of Karma, devotion and Knowledge.  The Sandhyavandanam consists of recitation from the Vedas, accompanied by ritual. These rituals are performed three times a day- at morning noon and evening. “Dvija” means “twice-born”: the first birth is physical, while the second birth is a ‘spiritual’ one. The second ‘birth’ occurs when one takes up fulfilling a role in society, at the time of Upanayana initiation ceremony.    This ritual has procedures and references from Vedas - Second Prasna, Second Anuvaka of Taittareeya Aranyaka (Yajur Veda) explaining procedures of worship by offering "Arghya" (water in the palms of both hands being thrown up), at the time of sunrise and sunset, med...