भगवान शिव की वंदना


ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्।।

अर्थ:-हम त्रिनेत्र को पूजते हैं,
जो सुगंधित हैं, हमारा पोषण करते हैं,
जिस तरह फल, शाखा के बंधन से मुक्त हो जाता है,
वैसे ही हम भी मृत्यु और नश्वरता से मुक्त हो जाएं।
We worship Trinetra, Those who are fragrant nourish us, As the fruit is released from the binding of the branch, In the same way, we too should be free from death and mortality.

यो ददाति सतां शम्भुः कैवल्यमपि दुर्लभम्
खलानां दण्डकृद्योऽसौ शङ्करः शं तनोतु मे

अर्थ:-जो शिव सत्‌ पुरुषों को अत्यंत दुर्लभ कैवल्य मुक्ति तक दे डालते हैं और जो दुष्टों को दण्ड देने वाले हैं वे कल्याणकारी श्री शम्भु मेरे कल्याण का विस्तार करें ।
Those who give away the extremely rare Kaivalya liberation to the SivaSatmus and those who are going to punish the wicked are welfare Mr. Sambhu extend my welfare 

कालकण्ठं कलामूर्तिं कालाग्निं कालनाशनम्।
नमामि शिरसा देवं किं नो मृत्यु: करिष्यति।।
अर्थ:-
जिनके कण्ठ में काला दाग है,जो कलामूर्ति, कालाग्नि स्वरूप और काल के नाशक हैं,उन भगवान शिव को मैं मस्तक झुकाकर प्रणाम  करता हूँ मृत्यु मेरा क्या कर लेगी?

Those who have black spot in the gorge, who are Kalamurti, Kalagni form and destroyer of Kaal, I bow down to Lord Shiva and salute him, what will death do to me?

औरउ एक गुपुत मत सबहि कहउँ कर जोरि। संकर भजन बिना नर भगति न पावइ मोरि॥ भावार्थ और भी एक गुप्त मत है, मैं उसे सबसे हाथ जोड़कर

कहता हूँ कि शंकरजी के भजन बिना मनुष्य मेरी भक्ति

नहीं पाता॥ There is another secret opinion,

I tell him with folded hands that

without Bhajan of Shankar ji,

man cannot attain my devotion.


अजात इत्येवं कश्चिद्भीरुः प्रपद्यते। रुद्र यत्ते दक्षिणं मुखं तेन मां पाहि नित्यम्।। (श्वेताश्वतरोपनिषद) अर्थात्

सबका संहार करनेवाले परमेश्वर ..! आप स्वयं अजन्मा हैं, अतः दूसरों को भी जन्म-मृत्यु से मुक्त कर देना आपका स्वभाव है - यह समझकर कोई जन्म-मरण के भय से डरा हुआ साधक इस संसार चक्र से छुटकारा पाने के लिए आपकी शरण लेता है। मैं भी इस संसार चक्र से छुटकारा पाने के लिए ही आपकी शरण में आया हूँ अतः जो आपका दाहिना मुख है,

अर्थात् जो आपका परम शान्त कल्याणमय स्वरूप है.


Hey Rudra ..! That is, God who destroys everyone ..! You yourself are unborn, so it is your nature to free others from birth and death - Assuming that there is a birth Fearful of fear, the seeker takes refuge in you to get rid of this world cycle. I have come to your shelter only to get rid of this world cycle. Therefore, which is your right face, that is, which is your ultimate peaceful welfare form.

सर्वदेवात्मको रुद्र सर्वे देवाः शिवात्मकाः। रुद्रात्प्रवर्तते बीजं बीजयोनिर्जनार्दनः।। यो रुद्रः स स्वयं ब्रह्मा यो ब्रह्मा स हुताशनः। ब्रह्मविष्णुमयो रुद्र अग्नीषोमात्मकं जगत्।

अर्थात - रूद्र ही ब्रह्रा, विष्णु है और सभी देवता रूद्र

अर्थात शिव का ही अंश है। सब कुछ रूद्र से ही जन्मा है।

कम शब्दों में कहा जाये तो सभी देवताओं की आत्मा रूद्र का ही अंश है और रूद्र ही स्वयंभू है।🙏

जरत सकल सुर बृंद बिषम गरल जेहिं पान किय।
तेहि न भजसि मन मंद को कृपाल संकर सरिस॥

भावार्थ

जिस भीषण हलाहल विष से सब देवतागण जल रहे थे

उसको जिन्होंने स्वयं पान कर लिया, रे मन्द मन! तू

उन शंकर जी को क्यों नहीं भजता? उनके समान कृपालु

(और) कौन है?

All the gods, who were burning with

the horrific venom and poison, consumed

those who themselves, oh dear mind! Why

don't you worship those Shankar ji?

Who is kind (and) like

them?

एक बार गुर लीन्ह बोलाई। मोहि नीति बहु भाँति सिखाई॥
सिव सेवा कर फल सुत सोई। अबिरल भगति राम पद होई॥1॥

भावार्थ

एक बार गुरु जी ने मुझे बुला लिया और बहुत प्रकार

से (परमार्थ) नीति की शिक्षा दी कि हे पुत्र! शिव जी की

सेवा का फल यही है कि 

श्री राम जी के चरणों में प्रगाढ़ भक्ति हो॥

Once, Guruji called me and taught me

a lot of (Paramarth) policy that, O son!

The result of Shiv ji's service is that

there should be deep devotion at the feet

of Shri Ram ji.


कुन्दइन्दुदरगौरसुन्दरं अम्बिकापतिमभीष्टसिद्धिदम्। कारुणीककलकञ्जलोचनं नौमि शंकरमनंगमोचनम्॥

अर्थ:-

कुन्द के फूल, चंद्रमा और शंख के समान सुंदर गौरवर्ण,

जगज्जननी श्री पार्वतीजी के पति, वान्छित फल के देने वाले,

(दुखियों पर सदा), दया करने वाले, सुंदर कमल के

समान नेत्र वाले, कामदेव से छुड़ाने वाले (कल्याणकारी)

श्री शंकरजी को मैं नमस्कार करता हू।

Beautiful Gauravarna like Kunda

flowers, moon and conch,

Jagjajnani husband of Shri Parvatiji,

giver of desired fruit,

(everlasting on sorrows), compassionate,

beautiful lotus-like eye, redeemer from

Cupid (welfare) Shri Shankar I salute shiv

आदित्यसोमवरुणानिलसेविताय यज्ञाग्निहोत्रवरधूमनिकेतनाय।

ऋक्सामवेदमुनिभि:स्तुतिसंयुताय गोपाय गोपनमिताय नम:शिवाय॥

अर्थ:- जो सूर्य,चन्द्र,वरूण व पवनद्वारा सेवितहैंयज्ञ वअग्निहोत्र्धूममें

जिनका निवासहै ऋक-सामादि वेदमुनिजन जिनकीस्तुतिकरतेहैंउन

नन्दीश्वरपूजित गौओंका पालनकरनेवाले शिवजी को प्रणाम

करता हु।

Those served by Surya, Chandra,

Varun and Pawan are residing in the Yajna

and ignorance, whose Rites-Samaadi

Vedamunijans, who are praised by those who

follow the Nandeshwar-worshiped cows,

are Shivaji


भवानी शङ्करौ वन्दे श्रद्धा विश्वास रूपिणौ।
याभ्यां विना न पश्यन्ति सिद्धाःस्वान्तःस्थमीश्वरम्।।

अर्थ:-


श्रद्धा  रूपी  माता  भवानी  और  विश्वास  रूपी  भगवान 

 शंकर  को  मै प्रणाम  करता  हूँ .
इन  दोनों  के बिना  सिद्ध लोग 

 भी  अपने  ह्रदय   में  बसे ईश्वर को  नहीं  देख  या 

 समझ  सकते  है.

Goddess Bhavani as faith and God as faith I bow to Shankar. Sant people without these two Can not see or understand the God in his

heart


नमामीशमीशान निर्वाणरूपं। विभुं व्यापकं ब्रह्मवेदस्वरूपम्।। निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं। चिदाकाशमाकाशवासं भजेऽहं।। अर्थ:-

हे मोक्षस्वरूप, विभु, ब्रह्म और वेदस्वरूप,

ईशान दिशा के ईश्वर व सबके स्वामी श्री शिव जी!

मैं आपको नमस्कार करता हूँ। निजस्वरूप में स्थित

(अर्थात माया आदि से रहित), गुणों से रहित, भेद रहित,

इच्छा रहित, चेतन आकाशरूप एवं आकाश को ही

वस्त्र रूप में धारण करने वाले दिगम्बर आपको भजता हूँ।

O Mokshawaroopa, Vibhu, Brahma and

Vedaswaroop, God of the northeast and

Lord Shiva! I greet you Situated in

private form (ie devoid of Maya etc.),

devoid of qualities, without distinction,

without desire, conscious celestials and

the Digambaras who wear the sky as clothes,

send them to you.

नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय भस्माङ्गरागाय महेश्वराय। नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय तस्मै नकाराय नम: शिवाय॥

अर्थ:-

शिव नागराज वासुकि का हार पहिने हुए हैं

तीन नेत्रों वाले हैं तथा भस्म की राख को सारे शरीर

में लगाये हुए हैं, इस प्रकार महान् ऐश्वर्य सम्पन्न शिव

अविनाशी तथा शुभ हैं। दिशायें जिनके लिए वस्त्रों का कार्य

करती हैं, ऐसे निरवच्छिन्न उस

नकार स्वरूप शिव को मैं नमस्कार करता हूँ।

Shiva Nagaraja is wearing a necklace of

Vasuki, having three eyes and putting

the ashes of Bhasma all over the body,

thus Shiva, who is blessed with great wealth, is indestructible and auspicious. Directions for which clothes work, such uncontaminated I salute Shiva, the negative form.


वसिष्ठकुम्भोद्भवगौतमार्य मुनीन्द्रदेवार्चितशेखराय। चन्द्रार्क वैश्वानरलोचनाय तस्मै व काराय नमःशिवाय ॥

भवार्थ:- वसिष्ठ मुनि,अगस्त्य ऋषि और गौतम ऋषि तथा इन्द्र

आदि देवताओं ने जिनके मस्तक की पूजा कीहै,

चन्द्रमा,सूर्य और अग्नि जिनके नेत्र हैं ऐसे व कारस्वरूप

शिव को नमस्कार है।

Goddess Vasistha Muni, Agastya Rishi and

Gautama Rishi and Indra, who have worshiped

their forehead, Moon, Sun and Agni,

who have eyes and such a way,

salutations to Shiva.

सुनि कपीस बहु दूत पठाए। मुनिबर सकल बोलि लै आए॥
लिंग थापि बिधिवत करि पूजा। सिव समान प्रिय मोहि न दूजा॥

भावार्थ

राम के वचन सुनकर वानरराज सुग्रीव ने बहुत-से दूत भेजे,

जो सब श्रेष्ठ मुनियों को बुलाकर ले आए। शिवलिंग की स्थापना

करके विधिपूर्वक उसका पूजन किया। (फिर भगवान बोले -)

शिव के समान मुझको दूसरा कोई प्रिय नहीं है।

Hearing Rama's words, Vanararaj Sugriva

sent many messengers, who called all the

best sages and brought them. Established

Shivling and worshiped it methodically.

(Then God said -)

I have no love like Shiva.


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