मनुस्मृति श्लोक
ब्रह्महत्या सुरापानं स्तेयं गुर्वङ्गनागमः॥
महान्ति पातकान्याहुः संसर्गश्चापि तैः सह।
(मनुस्मृति ११ । ५४)
अर्थ:-
‘ब्राह्मणकी हत्या करना, मदिरा पीना,स्वर्ण की चोरी करना,गुरुपत्नीके साथ व्यभिचार करना और जो इन चारोमेंसे किसी भी महापापको करनेवालेके साथ रहता है,वह पंच महापापीको कहलाता है।
'Killing a Brahmin, drinking liquor, stealing gold, adultery with a gurupatni and who lives with any of these four felonies is called a Pancha Mahapapi.
धर्म एव हतो हन्ति, धर्मों रक्षति रक्षितः।
तस्माद्धर्मों न हन्तव्यो मा नो धर्मों हतोऽवधीत्।।
-मनुस्मृति
अर्थात- मरा हुआ धर्म मारने वाले का नाश,और रक्षित किया हुआ धर्म रक्षक की रक्षा करता है, इसलिये धर्म का हनन अर्थात त्याग कभी नहीं करना चाहिए।
The dead religion destroys the slayer, and the protected religion protects the protector, so the religion should never be abused.
यद्यत्परवशं कर्म तत्तद्यत्नेन वर्जयेत् ।
यद्यदात्मवशं तु स्यात्तत्तत्सेवेत यत्नतः ॥
अर्थ:-
जो-जो पराधीन (धनादिसे साध्य ) कार्य है, उसका यत्नपूर्वक त्याग करे और जो-जो स्वाधीन( अपने शरीर आदि से साध्य ) कार्य है, उसे यत्नपूर्वक करे।
Whatever work is subordinate (positive), you should discard it diligently and whatever is independent (practicable from your body, etc.), do it diligently.
उपाध्यात् दश आचार्यः आचार्याणां शतं पिता।
सहस्रं तु पितृन माता गौरवेण अतिरिच्यते ॥
अर्थ-
एक आचार्य उपाध्याय से दस गुना श्रेष्ठ होता है। एक पिता सौ आचार्यों के समान होते है। माता, पिता से हजार गुना श्रेष्ठ होती है।
An Acharya is ten times better than Upadhyaya. A father is like a hundred masters. Mother is thousand times better than father.
गुरुं वा बालवृद्धौ वा ब्राह्मणं वा बहुश्रुतम्। आततायिनमायान्तं हन्यादेवाविचारयन्॥
अर्थात्:-
'ऐसे आततायी या दुष्ट मनुष्य को अवश्य मार डालें; किंतु यह विचार न करें कि वह गुरु है, बूढ़ा है, बालक है या विद्वान ब्राह्मण है।' शास्त्रकार कहते हैं कि[1] ऐसे समय हत्या करने का पाप हत्या करने वाले को नहीं लगता, किन्तु आततायी मनुष्य अपने अधर्म से ही मारा जाता है।
'Must kill such a terrorist or evil person; But do not consider that he is a Guru, old, child or learned Brahmin. ' The scriptures say that [1] at such a time, it is not the sin of the murderer to commit a murder, but a terrorist man is killed by his own unrighteousness.
"यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता।
यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्राफलाः क्रियाः।।"
#मनुस्मृति 3/56
अथार्त-जहा स्त्रियों की पूजा होती है वहा देवता
निवास करते है,और जहा स्त्रियों की पूजा नही होती उनका सम्मान नही होता वहा किए गए समस्त शुभ कर्म भी निष्फल हो जाते है।
That is, where women are worshiped, there the deity reside, and where women are not worshiped, they are not respected, all the good deeds done there also become fruitless.
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