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Showing posts from July, 2021

शिवपञ्चाक्षर स्तोत्र

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हिन्दी अनुवाद: शिवपञ्चाक्षर स्तोत्र के रचयिता आदि गुरु शंकराचार्य हैं, जो परम शिवभक्त थे। शिवपञ्चाक्षर स्तोत्र पंचाक्षरी मन्त्र नमः शिवाय पर आधारित है। न – पृथ्वी तत्त्व का म – जल तत्त्व का शि – अग्नि तत्त्व का वा – वायु तत्त्व का और य – आकाश तत्त्व का प्रतिनिधित्व करता है। The author of Shivpanchakshar Stotra is Adi Guru Shankaracharya, who was a great devotee of Shiva. Shivpanchakshar Stotra is based on Panchakshari mantra Namah Shivaya. no-earth element M - of water element shi – fire element Va – Air element and Y – represents the sky element. श्रीशिवपञ्चाक्षरस्तोत्रम् ॥ नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय, भस्माङ्गरागाय महेश्वराय । नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय, तस्मै न काराय नमः शिवाय ॥१॥ जिनके कण्ठ में सर्पों का हार है, जिनके तीन नेत्र हैं, भस्म ही जिनका अंगराग है और दिशाएँ ही जिनका वस्त्र हैं अर्थात् जो दिगम्बर (निर्वस्त्र) हैं ऐसे शुद्ध अविनाशी महेश्वर न कारस्वरूप शिव को नमस्कार है॥1॥ Whose throat is the necklace of snakes, Who has three eyes, Whose ashes are the cosmetic and Whose...

सन्यासी के लिए

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विजानन्ति महावाक्यं गुरोश्चरणसेवया ते वै संन्यासिनः प्रोक्ता इतरे वेषधारिणः.!! अर्थात् गुरुदेव के श्रीचरणों की सेवा करके महावाक्य के अर्थ को जो समझते हैं, वे ही सच्चे संन्यासी हैं, अन्य तो मात्र वेशधारी है। उद्धरेदात्मनात्मानं नात्मानमवसादयेत्। आत्मैं ह्यात्मनों बन्धुरात्मैव रिपुरात्मनः ॥ आत्मा ही आत्मा का सबसे प्रिय मित्र है और आत्मा ही आत्मा का परम शत्रु भी है इसलिए आत्मा का उद्धार करना चाहिए, विनाश नहीं| जिस व्यक्ति ने आत्मज्ञान से इस आत्मा को जाना है उसके लिए आत्मा मित्र है |  The soul is the dearest friend of the soul and the soul is also the ultimate enemy of the soul, so the soul should be saved, not destroyed.  The soul is a friend for the person who has come to know this soul through self-knowledge. यदा ते मोहकलिलं बुद्धिर्व्यतितरिष्यति | तदा गन्तासि निर्वेदं श्रोतव्यस्य श्रुतस्य च || अर्थ – श्री कृष्ण कहते हैं कि हे अर्जुन जब तुम्हारी बुद्धि इस मोहमाया के घने जंगल को पार कर जाएगी तब सुना हुआ या सुनने योग्य सब कुछ से तुम विरक्त हो जाओगे|  Shri Krishna says that O...

Remember Two Time -Article

परिचय:- आज के समय इस भाग दौड जिंदगी मे सनातन धर्म को मानने वाले लोगो मे अक्सर देखा गया है कि लोग अपने सनातन धर्म के कार्य मे अपना समय नही दे पा रहे है और दूसरे मजहब को देखकर अपने अंदर  सनातन धर्म के प्रति हीनता का भाव देख रहे है। अतः ऐसे लोगो के लिए और सनातन धर्म के लोगो के लिये मै यह सुनिश्चित करना चाहता हू कि सनातन धर्म अन्य मजहब से सरल, सुबोध, तुरन्त सुख-शांति और समृद्धि का साधन प्रदान करने वाले साधन का उल्लेख करता हू।

शिव मानस पूजा

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 (भगवान शिव योग मुद्रा) आदि गुरु शंकराचार्यद्वारा रचित शिव मानस पूजा शिवकी एक अनूठी स्तुति है । यह स्तुति शिव भक्ति मार्गको अत्यधिक सरलताके साथ ही एक अत्यंत गूढ रहस्यको समझाता है । शिव मात्र भक्तिद्वारा प्राप्त हो सकते हैं, उनकी भक्ति हेतु बाह्य आडम्बरकी कोई आवश्यकता नहीं है । इस स्तुतिमें हम प्रभूको भक्तिद्वारा मानसिक रूपसे कल्पनाकी हुई वस्तुएं समर्पित करते हैं । हम उन्हें रत्न जडित सिहांसनपर आसीन करते हैं, वस्त्र, नैवेद्य तथा भक्ति अर्पण करते हैं; परन्तु ये सभी हम स्थूल रूपमें नहीं अपितु मानसिक रूपमें अर्पण करते हैं । इस प्रकार हम स्वयंको शिवको समर्पित कर शिव स्वरूपमें विलीन हो जाते हैं । Shiva Manas Puja composed by Adi Guru Shankaracharya is a unique praise of Shiva. This hymn explains the path of Shiva-bhakti with great ease and a very deep secret. Shiva can be attained only by devotion, there is no need for outward pomp for his devotion. In this praise we offer things conceived mentally to the Lord by devotion. We make him sit on a stone studded throne, offer...

विष्णु सहस्रनाम

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विष्णु सहस्रनाम जीवन की सभी समस्याओं के लिए एक बेहद प्रभावी उपाय है। ये एक चमत्कारिक उपाय है अगर इसे पूरी श्रद्धा और विशवास के साथ किया जाए। नाम का जप करते हुए मन में श्रद्धा आती है। ये पोस्ट काफी लम्बी हो गयी है और इसलिए इसमें कई त्रुटियां भी रह गयी हो सकती हैं जिसके लिए मैं क्षमाप्रार्थी हूँ। विधि: इसे करने की विधि बिलकुल सीधी है। इसे करते हुए मन में विष्णु जी के लिए अगाध प्रेम और श्रद्धा होनी चाहिए। इसे करने का सबसे अच्छा समय सुबह है और पूर्व दिशा की ओर मुख करके करना चाहिए। विष्णु सहस्रनाम के फायदे : 1) इसका पाठ रोज़ करने वालों को सफलता और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। 2) भय और चिंताओं से मुक्ति मिलती है। 3) इसे करने वाला नकारात्मक शक्तियों से बचा रहता है। 4) सभी अड़चनें और समस्याएँ समाप्त हो जाती हैं। 5) यह प्रभु विष्णु के करीब लेकर आता है एवं इससे पाप कटते हैं। 6) इसे नित्य श्रद्धा से करने वाला जन्म मरण के चक्कर से छूट कर मोक्ष प्राप्त कर लेता है। 7) सभी इच्छाएं पूरी होती हैं। नोट: अगर कोई नीचे दिए पूरे संस्कृत के श्लोक न पढ़ पाए तो केवल 1000 नाम भी पढ़ सकता है। ॐ नमो भगवत...

वेदसार शिवस्तव:

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 पशूनां पतिं पापनाशं परेशं गजेन्द्रस्य कृत्तिं वसानं वरेण्यम् जटाजूटमध्ये स्फुरद्गाङ्गवारिं महादेवमेकं स्मरामि स्मरारिम्  ॥१॥ भावार्थ— जो सम्पूर्ण प्राणियों के रक्षक हैं, पापका ध्वंस करने वाले हैं, परमेश्वर हैं, गजराजका चर्म पहने हुए हैं तथा श्रेष्ठ हैं और जिनके जटाजूटमें श्रीगंगाजी खेल रही हैं, उन एकमात्र कामारि श्रीमहादेवजी का मैं स्मरण करता हुॅं ||1|| महेशं सुरेशं सुरारातिनाशं विभुं विश्वनाथं विभूत्यङ्गभूषम् विरूपाक्षमिन्द्वर्कवह्नित्रिनेत्रं सदानन्दमीडे प्रभुं पञ्चवक्त्रम् ॥२॥ भावार्थ— चन्द्र,सूर्य और अग्नि— तीनों जिनके नेत्र हैं, उन विरूपनयन महेश्वर, देवेश्वर, देवदु:खदलन, विभु, विश्वनाथ, विभूतिभूषण, नित्यानन्दस्वरूप, पंचमुख भगवान् महादेवकी मैं स्तुति करता हूॅं ||2|| गिरीशं गणेशं गले नीलवर्णं गवेन्द्राधिरूढं गुणातीतरूपम् भवं भास्वरं भस्मना भूषिताङ्गं भवानीकलत्रं भजे पञ्चवक्त्रम् ॥३॥ भावार्थ— जो कैलासनाथ हैं, गणनाथ हैं, नीलकण्ठ हैं, बैलपर चढ़े हुए हैं, अगणित रूपवाले हैं, संसारक आदिकारण हैं, प्रकाशस्वरूप हैं, शरीर में भस्म लगाये हुए हैं और श्री पार्वतीजी जिनकी अद्र्धागिंनी ह...

लिंगाष्टकं -Sri Lingashtakam

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भगवान शिव की महिमा का वर्णन किया गया है। प्रत्येक श्लोक में भगवान की महिमा और शिव लिंग की पूजा के लाभों को वर्णित किया गया है। इसमें यह भी उल्लेखित है कि विष्णु और ब्रह्मा द्वारा भी लिंग की पूजा की जाती है। यह मंत्र हर समय शांति से ओत प्रोत कर जन्म और पुनर्जन्म के चक्र के कारण किसी भी दुख को नष्ट कर देता है। The glory of Lord Shiva has been described. The glory of the Lord and the benefits of worshiping the Shiva Linga are described in each verse. It also mentions that the linga is also worshiped by Vishnu and Brahma. This mantra destroys any suffering due to the cycle of birth and rebirth by instilling peace at all times. ब्रह्ममुरारि सुरार्चित लिंगं निर्मलभासित शोभित लिंगम् । जन्मज दुःख विनाशक लिंगं तत्-प्रणमामि सदाशिव लिंगम् ॥ १ ॥ हम उन सदाशिव लिंग को प्रणाम करते हैं। जिनकी ब्रह्मा विष्णु एवं देवताओं द्वारा भी अर्चना की जाती है आप सदैव निर्मल भाषाओं द्वारा पुजित हैं और जो लिंग जन्म-मृत्यू के चक्र का विनाश करता है (सभी को मोक्ष प्रदान कराता है) We salute that Sadashiv Linga. Who is w...

भज गोविन्दम्

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भज गोविन्दं भज गोविन्दं, गोविन्दं भज मूढ़मते। संप्राप्ते सन्निहिते काले, न हि न हि रक्षति डुकृञ् करणे॥१॥ हे मोह से ग्रसित बुद्धि वाले मित्र, गोविंद को भजो, गोविन्द का नाम लो, गोविन्द से प्रेम करो क्योंकि मृत्यु के समय व्याकरण के नियम याद रखने से आपकी रक्षा नहीं हो सकती है॥१॥ मूढ़ जहीहि धनागमतृष्णाम्, कुरु सद्बुद्धिमं मनसि वितृष्णाम्। यल्लभसे निजकर्मोपात्तम्, वित्तं तेन विनोदय चित्तं॥२॥ हे मोहित बुद्धि! धन एकत्र करने के लोभ को त्यागो। अपने मन से इन समस्त कामनाओं का त्याग करो। सत्यता के पथ का अनुसरण करो, अपने परिश्रम से जो धन प्राप्त हो उससे ही अपने मन को प्रसन्न रखो॥२॥ नारीस्तनभरनाभीदेशम्, दृष्ट्वा मागा मोहावेशम्। एतन्मान्सवसादिविकारम्, मनसि विचिन्तय वारं वारम्॥३॥ स्त्री शरीर पर मोहित होकर आसक्त मत हो। अपने मन में निरंतर स्मरण करो कि ये मांस-वसा आदि के विकार के अतिरिक्त कुछ और नहीं हैं॥३॥ नलिनीदलगतजलमतितरलम्, तद्वज्जीवितमतिशयचपलम्। विद्धि व्याध्यभिमानग्रस्तं, लोक शोकहतं च समस्तम्॥४॥ जीवन कमल-पत्र पर पड़ी हुई पानी की बूंदों के समान अनिश्चित एवं अल्प (क्षणभंगुर) है। यह समझ लो कि समस्त विश...