राम तत्व के बारे मे कागभुशुण्डिजी का निज अनुभव

बिनु संतोष न काम नसाहीं। काम अछत सुख सपनेहुँ नाहीं॥
राम भजन बिनु मिटहिं कि कामा। थल बिहीन तरु कबहुँ कि जामा॥1॥

भावार्थ

संतोष के बिना कामना का नाश नहीं होता और कामनाओं के रहते स्वप्न में भी सुख नहीं हो सकता और श्री राम के भजन बिना कामनाएँ कहीं मिट सकती हैं? बिना धरती के भी कहीं पेड़ उग सकता है?॥1॥

Comments

Popular posts from this blog

धर्म के दश लक्षण (मनु के अनुसार)

शास्त्र

राम नाम का महत्व(स्वामीरामसुखदास महाराज)