मानसरोवर का रूप

भगति निरूपन बिबिध बिधाना। छमा दया दम लता बिताना॥
सम जम नियम फूल फल ग्याना। हरि पद रति रस बेद बखाना॥

भावार्थ-

नाना प्रकार से भक्ति का निरूपण और क्षमा, दया तथा दम (इंद्रिय निग्रह) लताओं के मंडप हैं। मन का निग्रह, यम (अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह), नियम (शौच, संतोष, तप, स्वाध्याय और ईश्वर प्रणिधान) ही उनके फूल हैं, ज्ञान फल है और हरि के चरणों में प्रेम ही इस ज्ञानरूपी फल का रस है। ऐसा वेदों ने कहा है।

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