भगवान श्रीकृष्ण स्रुति

नमो कृष्णरूपं श्रीहरिं अच्युतानन्द जगत्पते।
मोरमुकुटमणिशोभितं  च सर्वषां मनहरिणम्।।
अर्थ:-
 माथे मोर के मुकुट और हृदय पर मणियों की माला से सुशोभित और सभी के मन का हरण करनेवाले भगवान श्रीकृष्ण के रूप में आविर्भूत् अच्युतानन्द जगत्पति श्रीहरिविष्णु भगवान को नमस्कार है.

सहस्रनाम्नां पुण्यानां त्रिरावृत्त्या तु यत्फलम् ।
एकावृत्त्या तु कृष्णस्य नामैकं तत्प्रयच्छति ॥
(ब्रह्मांडपुराण)

विष्णु के तीन सहस्र नाम जप(विष्णुसहस्त्रनाम) के द्वारा प्राप्त पुण्य, केवल एक बार कृष्ण नाम लेने के द्वारा ही प्राप्त किया जा सकता है । 

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