नरसिंह पुराण

प्रसीद सर्वदेवेश प्रसीद कमलेक्षण प्रसीद   मन्दरधर प्रसीद मधुसूदन।
प्रसीद सुभगाकान्त प्रसीद भुवनाधिप प्रसीदाद्य   महादेव प्रसीद मम केशव।।
(श्रीनरसिंहपुराण,११/४-५)

अर्थ:-कमलके समान नेत्रोंवाले सर्वदेवेश्वर! आप प्रसन्न हों,प्रसन्न हों।समुद्र मंथन के समय मन्दर पर्वत ....को धारण करने वाले मधुसूदन!आप प्रसन्न हों, प्रसन्न हों। लक्ष्मीकांत!भुवनपते! आप प्रसन्न हों, प्रसन्न हों।आदिपुरुष महादेव!केशव!आप मुझपर प्रसन्न हों, प्रसन्न हों।'

यं ब्रह्मा वरुणेन्द्र रुद्र मरुतः स्तुन्वन्ति दिव्यैस्तवैः
वेदैः साँगपदक्रमोपनिषदैः गायन्ति यं सामगाः।

ध्यानावस्थित तद्गतेन मनसा पश्यन्ति यं योगिनो
यस्यान्तं न विदुः सुरासुरगणाः देवाय तस्मै नमः।।

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