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Showing posts from October, 2021

सुदर्शन चक्र की वंदना

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जयमुच्चरिष्याम्यहं चक्रं स्थो विष्णुनस्करे । यस्य कारणं हि लोके पीठरूपा भगवती ।। मैं भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र की सदा जय बोलता रहुँगा जिसके कारण ही आज संसार में मेरी भगवती शक्तिपीठों के रूप में विराजमान हैं। I will always chant victory of the Sudarshan Chakra of Lord Vishnu, due to which today my Bhagwati is placed as Shaktipeeths in the world.

कमला स्तोत्रम्

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कमला स्तोत्रम् श्री लक्ष्म्यै नमः अथातः सम्प्रवक्ष्यामि लक्ष्मीस्तोत्रमनुत्तमम्। पठनात् श्रवणाद्यस्य नरो मोक्षमावाप्नुयात्॥ गुह्याद्गुह्यतरं पुण्यं सर्वदेवनमस्कृतम्। सर्वमन्त्रमयं साक्षाच्छृणु पर्वतनन्दिनि॥ अनन्तरूपिणी लक्ष्मीरपारगुणसागरी। अणिमादिसिद्धिदात्री शिरसा प्रणमाम्यहम।।

माँ गौरी स्तुति- माता सीता द्वारा

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माँ गौरी स्तुति जय जय गिरिराज किसोरी। जय महेस मुख चंद चकोरी॥ जय गजबदन षडानन माता। जगत जननि दामिनी दुति गाता॥ देवी पूजि पद कमल तुम्हारे। सुर नर मुनि सब होहिं सुखारे॥ मोर मनोरथ जानहु नीकें। बसहु सदा उर पुर सबही के॥ कीन्हेऊं प्रगट न कारन तेहिं। अस कहि चरन गहे बैदेहीं॥ बिनय प्रेम बस भई भवानी। खसी माल मुरति मुसुकानि॥ सादर सियं प्रसादु सर धरेऊ। बोली गौरी हरषु हियं भरेऊ॥ सुनु सिय सत्य असीस हमारी। पूजिहि मन कामना तुम्हारी॥ नारद बचन सदा सूचि साचा। सो बरु मिलिहि जाहिं मनु राचा॥ मनु जाहिं राचेउ मिलिहि सो बरु सहज सुंदर सांवरो। करुना निधान सुजान सीलु सनेहु जानत रावरो॥ एही भांती गौरी असीस सुनी सिय सहित हियं हरषीं अली। तुलसी भवानिहि पूजि पुनि पुनि मुदित मन मंदिर चली॥

सरस्वती स्तोत्रम्

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सरस्वती स्तोत्रम्:-- श्वेतपद्मासना देवि श्वेतपुष्पोपशोभिता। श्वेताम्बरधरा नित्या श्वेतगन्धानुलेपना॥ श्वेताक्षी शुक्लवस्रा च श्वेतचन्दन चर्चिता। वरदा सिद्धगन्धर्वैर्ऋषिभिः स्तुत्यते सदा॥ स्तोत्रेणानेन तां देवीं जगद्धात्रीं सरस्वतीम्। ये स्तुवन्ति त्रिकालेषु सर्वविद्दां लभन्ति ते॥  या देवी स्तूत्यते नित्यं ब्रह्मेन्द्रसुरकिन्नरैः। सा ममेवास्तु जिव्हाग्रे पद्महस्ता सरस्वती॥ ॥इति श्रीसरस्वतीस्तोत्रं सम्पूर्णम्

माता महागौरी ध्यान मंत्र:

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श्वेते वृषे समरूढा श्वेताम्बराधरा शुचिः। महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा।। ॐसर्वमंगल मांगल्ये,शिवे सर्वार्थ साधिके।  शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोस्तुते।।  माता महागौरी ध्यान मंत्र:--- वन्दे वांछित कामार्थे चन्द्रार्घकृत शेखराम्। सिंहरूढ़ा चतुर्भुजा महागौरी यशस्वनीम्॥  पूर्णन्दु निभां गौरी सोमचक्रस्थितां अष्टमं महागौरी त्रिनेत्राम्। वराभीतिकरां त्रिशूल डमरूधरां महागौरी भजेम्॥ पटाम्बर परिधानां मृदुहास्या नानालंकार भूषिताम्। मंजीर, हार, केयूर किंकिणी रत्नकुण्डल मण्डिताम्॥ प्रफुल्ल वंदना पल्ल्वाधरां कातं कपोलां त्रैलोक्य मोहनम्।कमनीया लावण्यां मृणांल चंदनगंधलिप्ताम्॥ मनोकामना। सर्वसंकट हंत्री त्वंहि धन ऐश्वर्य प्रदायनीम्। ज्ञानदा चतुर्वेदमयी महागौरी प्रणमाभ्यहम्॥ सुख शान्तिदात्री धन धान्य प्रदीयनीम्। डमरूवाद्य प्रिया अद्या महागौरी प्रणमाभ्यहम्॥ त्रैलोक्यमंगल त्वंहि तापत्रय हारिणीम्। वददं चैतन्यमयी महागौरी प्रणमाम्यहम्॥ महागौरी की आराधना से किसी प्रकार के रूप और मनोवांछित फल प्राप्त किया जा सकता है और जीवन की अनेक समस्याओं एवंपरेशानियों का नाश होता है।मां ...

सौन्दर्यलहरि स्तोत्रं(Soundarya Lahari Lyrics in English)

  सौन्दर्यलहरि स्तोत्रं भुमौस्खलित पादानाम् भूमिरेवा वलम्बनम् । त्वयी जाता पराधानाम् त्वमेव शरणम् शिवे ॥ शिवः शक्त्या युक्तो यदि भवति शक्तः प्रभवितुं न चेदेवं देवो न खलु कुशलः स्पन्दितुमपि। अतस्त्वाम् आराध्यां हरि-हर-विरिन्चादिभि रपि प्रणन्तुं स्तोतुं वा कथ-मक्र्त पुण्यः प्रभवति॥ 1 ॥ तनीयांसुं पांसुं तव चरण पङ्केरुह-भवं विरिञ्चिः सञ्चिन्वन् विरचयति लोका-नविकलम् । वहत्येनं शौरिः कथमपि सहस्रेण शिरसां हरः सङ्क्षुद्-यैनं भजति भसितोद्धूल नविधिम्॥ 2 ॥ अविद्याना-मन्त-स्तिमिर-मिहिर द्वीपनगरी जडानां चैतन्य-स्तबक मकरन्द श्रुतिझरी । दरिद्राणां चिन्तामणि गुणनिका जन्मजलधौ निमग्नानां दंष्ट्रा मुररिपु वराहस्य भवति॥ 3 ॥ त्वदन्यः पाणिभया-मभयवरदो दैवतगणः त्वमेका नैवासि प्रकटित-वरभीत्यभिनया । भयात् त्रातुं दातुं फलमपि च वांछासमधिकं शरण्ये लोकानां तव हि चरणावेव निपुणौ ॥ 4 ॥ हरिस्त्वामारध्य प्रणत-जन-सौभाग्य-जननीं पुरा नारी भूत्वा पुररिपुमपि क्षोभ मनयत् । स्मरो‌உपि त्वां नत्वा रतिनयन-लेह्येन वपुषा मुनीनामप्यन्तः प्रभवति हि मोहाय महताम् ॥ 5 ॥ धनुः पौष्पं मौर्वी मधुकरमयी पञ्च विशिखाः वसन्तः सामन्तो मलयमरु...