संकट-नाश /पीड़ा नाश के लिए चौपाई
संकट-नाश के लिए---
जौं प्रभु दीन दयालु कहावा। आरति हरन बेद जसु गावा।।जपहिं नामु जन आरत भारी। मिटहिं कुसंकट होहिं सुखारी।।
दीन दयाल बिरिदु संभारी। हरहु नाथ मम संकट भारी।।'
रोग तथा उपद्रवों की शांति के लिए--
दैहिक दैविक भौतिक तापा। राम राज काहूहिं नहि ब्यापा॥'
विघ्न शांति के लिए
' सकल विघ्न व्यापहिं नहिं तेही। राम सुकृपाँ बिलोकहिं जेही॥'
' सकल विघ्न व्यापहिं नहिं तेही। राम सुकृपाँ बिलोकहिं जेही॥'
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