भक्ति बढ़ाने वाले भगवत गीता के श्लोक

अश्रद्दधानाः पुरुषा धर्मस्यास्य परन्तप।

अप्राप्य मां निवर्तन्ते मृत्युसंसारवर्त्मनि।।9.3।।
---भगवत गीता
हे परंतप! इस धर्मकी महिमापर श्रद्धा न रखनेवाले मनुष्य मेरे प्राप्त न होकर मृत्युरूप संसारके मार्गमें लौटते रहते हैं अर्थात् बार-बार जन्मते-मरते रहते हैं।

O Parantap!  People who do not have faith in the glory of this religion, without attaining Me, keep returning to the path of the world in the form of death, that is, they keep on taking birth and dying again and again.

'मनसा परमात्मानं ध्यात्वा तद्रूपतामियात्।'

अर्थ -

मन के द्वारा परमात्मा का चिन्तन करते हुए तदनुरूप बनने का प्रयत्न करना चाहिए।
- त्रिशिखब्राह्मणोपनिषद् (मंत्रभाग १२९) 

Comments

Popular posts from this blog

धर्म के दश लक्षण (मनु के अनुसार)

शास्त्र

ब्राह्मण के नौ गुण क्या होते हैं