श्रीमन्नारायणाष्टकम्

🚩🚩. श्रीमन्नारायणाष्टकम्. 🚩🚩

 वात्सल्यादभयप्रदानसमयादार्तार्तिनिर्वापणा दौदार्यादघशोषणादगणितश्रेय : पदप्रापणात् । सेव्य : श्रीपतिरेक एव जगतामेतेऽभवन्साक्षिण : प्रह्लादश्च विभीषणश्च करिराट् पाञ्चाल्यहल्या ध्रुवः ॥ १ ॥ 

अति वात्सल्यमय होनेके कारण , भयभीतोंको अभयदान देनेका स्वभाव होनेके कारण , दुःखी पुरुषोंका दुःख हरनेके कारण , अति उदार और पापनाशक होनेके कारण और अन्य अगणित कल्याणमय पदों ( श्रेयों ) की प्राप्ति करा देनेके कारण सारे जगत् के लिये भगवान् लक्ष्मीपति ही सेवनीय हैं! क्योंकि प्रह्लाद , विभीषण , गजराज , द्रौपदी , अहल्या और ध्रुव - ये ( क्रमसे ) इन कार्योंमें साक्षी हैं ॥ १ ॥
 ॐ नमो नारायणाय ॐ नमो भगवते वासुदेवाय

Comments

Popular posts from this blog

धर्म के दश लक्षण (मनु के अनुसार)

शास्त्र

ब्राह्मण के नौ गुण क्या होते हैं