भगवान्के प्रिय भक्तोंकी महिमा
🌹🌹भगवान्के प्रिय भक्तोंकी महिमा 🌹🌹
हरि के जे वल्लभ हैं दुर्लभ भुवन माँझ तिनहीं की पदरेणु आसा जय करी है । योगी यती तपी तासों मेरो कछु काज नाहिं प्रीति परतीत रीति मेरी मति हरी है । कमला गरुड़ जाम्बवान सुग्रीव आदि सबै स्वाद रूप कथा पोथिन में धरी है ।
प्रभुसों सचाई जग कीरति चलाई अति मेरे मन भाई सुखदाई रस भरी है ॥ २६ ॥
अर्थात = जो भगवान्के प्यारे भक्त हैं वे चौदहों भुवनोंमें दुर्लभ हैं मैंने उन्हींकी चरणरेणुको प्राप्त करनेकी आशा की है । भक्तिहीन जो कोरे योगी संन्यासी और तपस्वी हैं उन लोगोंसे मेरा कुछ भी प्रयोजन नहीं है ।
भक्तोंकी प्रीति , विश्वास और उपासनाकी रीतिने मेरी बुद्धिको अपनी ओर खींच लिया है । लक्ष्मी , गरुड़ , जाम्बवान् और सुग्रीव आदिकी अति मधुर कथाएँ पुराण आदि ग्रन्थों में लिखी हैं जिन भक्तोंने प्रभुसे निष्कपट सच्चा प्रेम किया तथा संसारमें अपनी और भगवान्की कीर्ति फैलायी ,उनकी वह रसमयी मधुर गाथा मेरे मनको बहुत अच्छी लगी ; क्योंकि वह सुनने - सुनानेमें हृदयको सुख देनेवाली है ॥ २६ ॥
जय श्रीमन्नारायण जय श्री सीताराम🌹
स्त्रोत : - श्रीनाभादासजीकृत श्रीभक्तमाल ( गीताप्रेस , गोरखपुर ) 🌹🌹
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