न्यायसूत्र

मोक्ष के लिये आत्मविद्या का लगातार पढ़ना, सुनना, और विचार करना तथा अध्यात्म शास्त्र जानने वालों के साथ बुद्धि की परिपक्वता के लिये सदा वार्तालाप करना चाहिये, उससे सन्देह की निवृत्ति, विषयों का बोध और निश्चित अभ्यनुज्ञान होते हैं। 

#न्यायसूत्र

असूया रहित शिष्य, गुरु, सहाध्यायी उत्कृष्ट ज्ञानवान् और मुमुक्षु, इनके द्वारा अध्यात्म विद्वान् से सत्संग करे।

किसी पदार्थ इच्छुक की जब कामना पूरी हो जाती, तब झट दूसरी कामना इसे दुःख
देने लगती है । यदि समुद्र पर्यन्त यह पृथिवी इसे मिलजाय, तो भी इस की तृप्ति न होगी किन्तु दूसरी इच्छा उत्पन्न हो जायगी। 

-न्यायदर्शन

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