स्कन्दपुराण
४/६
(स्कन्दपुराण ब्राह्मखण्ड चातुर्मास्यमाहत्म्य)
भगवान् शंकर -
पार्वती! भगवान् विष्णुके सहस्रनामोंमें जो सारभूत नाम है, मैं उसीका नित्य-निरंतर चिन्तन करता हूं।मैं राम नाम जपता हूँ और उसीके अंककी मालाके द्वारा गिनती करता हूँ।राम-नाम कोटि मन्त्रोंसे अधिक फल देनेवाला है।५/६
'राम' इस दो अक्षरके नामका जप सब पापोंका नाश करनेवाला है। मनुष्य चलते, खड़े होते और सोते समय भी श्रीराम-नामका कीर्तन करनेसे इह लोकमें सुख पाता है और अन्तमें भगवान्का पार्षद होता है। इस भूमितलपर राम-नामसे बढ़कर कोई पाठ नहीं है।
६/६
जो राम-नामकी शरण ले चुके हैं, उन्हें कभी यमलोककी यातना नहीं भोगनी पड़ती।जो-जो विघ्नकारक दोष हैं, सब राम-नामका उच्चारण करनेमात्रसे नष्ट हो जाते हैं। 'राम' यह मन्त्रराज भय तथा व्याधियोंका नाश करनेवाला है, युद्धमें विजय देनेवाला तथा समस्त कार्यों एवं मनोरथोंका सिद्ध करनेवाला है।
१/६
भक्तवाञ्छा- कल्पतरु भगवान् श्रीहरिको अपने भक्त अतिशय प्रिय हैं। अतएव भगवान्के नाते ही उनके प्यारे भक्त प्रात:स्मरणीय और नित्य वन्दनीय हैं।
२/६
'भगतिवंत अति नीचउ प्रानी। मोहि प्रानप्रिय असि मम बानी ॥'– श्रीरामचरितमानसकी इस उक्तिके अनुसार भगवान्के भक्त चाहे किसी भी कुल, गोत्र और जातिके क्यों न हों, उन परम प्रभुको वे सभी अपने प्राणोंके समान ही प्रिय हैं।
३/६
भगवान्के भक्तोंका स्मरण और उनके नामोंका उच्चारणमात्र भी अन्तःकरणको पवित्र और भगवान्में सहज प्रीति उत्पन्न करनेवाला है।अतएव रोचक, ज्ञानप्रद और निरन्तर अनुशीलनयोग्य भक्तगाथाओंके अधिकाधिक अध्ययनद्वारा सभी जिज्ञासुओं,भगवद्भक्तों और प्रेमी पाठकोंको आध्यात्मिक लाभ उठाना चाहिये ।
मिटिहहिं पाप प्रपंच सब अखिल अमंगल भार । लोक सुजसु परलोक सुखु सुमिरत नामु तुम्हार ॥
श्री रघुनाथ जी बोले- हे भरत! तुम्हारा नाम स्मरण करते ही सब पाप, अज्ञान और समस्त अमंगलों के समूह मिट जाएँगे तथा इस लोक में सुंदर यश और परलोक में सुख प्राप्त होगा ॥
Comments
Post a Comment