वर्णसङ्करकारक

प्रश्न = अंतर जातीय विवाह करने से क्या दुर्गति होती है ? 

देखिए आज कल हिन्दुओ का क्या हाल है कि ग्रँथों को मानेंगे लेकिन ग्रँथों की नही मानेंगे।।

सरकार भी अंतर जातीय विवाह के लिए फंडिंग देती है और बड़े बड़े हिन्दू संगठन @VHPDigital  @RSSorg अंतर जातीय विवाह को समर्थन करते है । https://t.co/21G1HlsKl0

आइए देखते है कि भगवत गीता क्या कहती है अंतर जातीय विवाह करने से क्या दुर्गती होती है।
कुलक्षये प्रणश्यन्ति कुलधर्माः सनातनाः । धमें नष्टे कुलं कृत्स्नमधर्मोऽभिभवत्युत ॥ 

अर्थात = कुलके नाशसे सनातन कुल - धर्म नष्ट हो जाते हैं , धर्मके नाश हो जानेपर सम्पूर्ण कुलमें पाप भी बहुत फैल जाता है 
अधर्माभिभवात्कृष्ण प्रदुष्यन्ति कुलस्त्रियः । स्त्रीषु दुष्टासु वार्ष्णेय जायते वर्णसङ्करः ॥

अर्थात = हे कृष्ण ! पापके अधिक बढ़ जानेसे कुलकी स्त्रियाँ अत्यन्त दूषित हो जाती हैं और हे वार्ष्णेय ! स्त्रियोंके दूषित हो जानेपर वर्णसङ्कर उत्पन्न होता है ॥ https://t.co/aL7T7UCIC7

सङ्करो नरकायैव कुलघ्नानां कुलस्य पतन्ति पितरो ह्येषां लुप्तपिण्डोदकक्रियाः ॥

अर्थात = वर्णसङ्कर कुलघातियोंको और कुलको नरकमें ले जानेके लिये ही होता है । लुप्त हुई पिण्ड और जलकी किर्यावाले वर्जित इनके पितरलोग भी गतिको प्राप्त होते है


दोषैरेतैः कुलघ्नानां वर्णसङ्करकारकैः उत्साद्यन्ते जातिधर्माः कुलधर्माश्च शाश्वताः ॥ 

अर्थात = इन वर्णसङ्करकारक दोषोंसे कुलघातियोंके सनातन कुल - धर्म और जाति - धर्म नष्ट हो जाते हैं ॥


उत्सन्नकुलधर्माणां मनुष्याणां जनार्दन । नरकेऽनियतं वासो भवतीत्यनुशुश्रुम ॥

अर्थात = हे जनार्दन ! जिनका कुल - धर्म नष्ट हो गया है  ऐसे मनुष्योंका अनिश्चित कालतक नरकमें वास होता है , ऐसा हम सुनते आये हैं ॥

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