वरुण मुद्रा क्या है

वरुण मुद्रा क्या है :-
यह मुद्रा जल की कमी से होने वाले सभी तरह के रोगों से हमें बचाती है। हमारा शरीर पाँच तत्वों से मिलकर बना है। जब हमारे शरीर में जल और वायु तत्व का संतुलन बिगड़ जाता है तो हमें वात और कफ संबंधी रोग होने लगतें हैं। इन सभी रोगों से बचने के लिए वरुण मुद्रा की जाती है।
पृथ्वी मुद्रा के लाभ :-
  • शरीर के अस्थि संस्थान एवं मांसपेशियों को यह मजबूत बनाती है। ...
  • शरीर में विटामिनों की कमी को दूर करती है , जिसमें हमारी ऊर्जा बढती है और चेहरे पर चमक आती है।
  • पृथ्वी मुद्रा से जीवन शक्ति का विस्तार होता है। ...
  • शरीर में स्फूर्ति , कान्ति और तेजस्व बढ़ता है।
  • इस मुद्रा से आंतरिक प्रसन्नता का आभास होता है ।

  • सूर्य मुद्रा के फायदे
    • इसे सूरज की मुद्रा के रूप में भी जाना जाता है। इससे शरीर के तापमान को बनाये रखने और दृष्टि को बेहतर बनाने में मदद मिलती है। ...
    • यह शरीर में ताप उत्पन्न करता है। ...
    • आपके शरीर में मेटाबॉलिज्म को बढ़ाती है।
    • आपके शरीर में पाचन में मदद करती है।
    • आपकी बॉडी में फैट कंटेंट को घटाती है।
    प्राण मुद्रा के फायदे
    प्राण मुद्रा का ये अभ्यास भूख और प्यास को भी नियंत्रित करने का काम करता है। इस अभ्यास से प्रतिरोधक क्षमता भी मजबूत होती है। तन-मन की दुर्बलता, थकान और नस-नाड़ियों की पीड़ा को दूर करने में में यह मुद्रा खास तौर से उपयोगी है, क्योंकि इससे रक्त शुद्ध होता है। रक्त वाहिनियों के अवरोध भी दूर होते हैं।
  • दोनों मुद्राएं करने के लाभ:-
    • इस मुद्रा का अभ्यास करने वाले को चेतना शक्ति प्राप्त होती है।
    • ये मन को शांति देता है। ...
    • इसको करने से आज्ञा चक्र में ध्यान लगता है।
    • इससे हडि्डयां मजबूत बन जाती है।
    • दिल के सारे रोगों को दूर करने मे मदद मिलती है। ...
    • कान बहना, कान में दर्द आदि दूर हो जाते हैं।
    • इसको करने से सुनने की शक्ति तेज होती है।

    पेट, तिल्ली और अग्न्याशय बेहतर कार्य करते हैं।
     निम्न रक्तचाप के लिए चिकित्सीय। बेहतर खान-पान को बढ़ावा देता है। यह मुद्रा हड्डियों, मांसपेशियों को मजबूत बनाती है और वजन बढ़ाने में उपयोगी है
अंजलि मुद्रा का अभ्यास नियमित रूप से अधिक जागरूकता लाता है, एकाग्रता को बढ़ाता है और मन को शांत करता है जिससे तनाव से राहत मिलती है
ज्ञान मुद्रा के लाभ
  • बुद्धिमत्ता और स्मरणशक्ति में वृद्धि होती हैं।
  • एकाग्रता बढती हैं।
  • शरीर की रोग प्रतिकार शक्ति बढती हैं।
  • ज्ञान मुद्रा का नियमित अभ्यास करने से सारे मानसिक विकार जैसे क्रोध, भय, शोक, ईर्ष्या इत्यादि से छुटकारा मिलता हैं।
  • ध्यान / मेडीटेसन करने के लिए उपयुक्त मुद्रा हैं।
  • आत्मज्ञान की प्राप्ति होती हैं।

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