use of ram naam

लव निमेष परमानु जुग बरष कलप सर चंड।
भजसि न मन तेहि राम को कालु जासु कोदंड॥ 
लव, निमेष, परमाणु, वर्ष, युग और कल्प जिनके प्रचण्ड बाण हैं और काल जिनका धनुष है, हे मन! तू उन श्रीराम जी का निरन्तर स्मरण क्यों नहीं करता है?

अंहकार सिव बुद्धि अज मन ससि चित्त महान।
मनुज बास सचराचर रुप राम भगवान्।। 
शिव जिनका अहंकार हैं, ब्रह्मा बुद्धि हैं, चंद्रमा मन हैं और महान् (विष्णु) ही चित्त हैं। उन्हीं चराचर रूप w राम ने मनुष्य रूप में निवास किया है॥


राम नाम कलि कामतरु राम भगति सुरधेनु।

सकल सुमंगल मूल जग गुरुपद पंकर रेनु॥


राम नाम कलि कामतरु सकल सुमंगल कंद। सुमिरत करतल सिद्धि सब पग पग परमानंद॥

कलियुग में रामनाम मनचाहा फल देने वाले कल्प वृक्ष के समान है, रामभक्ति मुँहमाँगी वस्तु देने वाली कामधेनु है, श्रीसद्गुरु के चरणकमल की रज संसार में सब प्रकार के मंगलों की जड़ है॥


श्रीराम का नाम कलियुग में कल्पवृक्ष के समान है और सब प्रकार के श्रेष्ठ मंगलों का परम सार है।रामनाम के स्मरण से ही सब सिद्धियाँ वैसे ही प्राप्त हो जाती हैं, जैसे कोई चीज हथेली में ही रखी हो और पद-पद पर परम आनन्द की प्राप्ति होती है॥



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