सरस्वतीजी गुण और यश कहने और सुनने से अज्ञान का नाश कर देती है॥
पुनि बंदउँ सारद सुरसरिता। जुगल पुनीत मनोहर चरिता॥
मज्जन पान पाप हर एका। कहत सुनत एक हर अबिबेका॥
मैं सरस्वती और देवनदी गंगाजी की वंदना करता हूँ। दोनों पवित्र और मनोहर चरित्र वाली हैं। एक (गंगाजी) स्नान करने और जल पीने से पापों को हरती है और दूसरी (सरस्वतीजी) गुण और यश कहने और सुनने से अज्ञान का नाश कर देती है॥
अस्पष्टमपि यन्नाम प्रसङ्गेनापि भाषितम् ।
ददाति वान्छितानर्थान् दुर्लभामपि सर्वथा ॥
(दे. भा. 3.9.42-44)
जिनका नाम अस्पष्ट, अधूरा व बिना निमित्त लेनेपर भी दुर्लभ वाञ्छितार्थं देता है, जो वन में व्याघ्र इत्यादि देखकर भयभीत होने के कारण 'ऐ, ऐ' बिन्दुहीन उच्चारण करने पर भी वे इच्छित अर्थ प्रदान करती हैं। एक बार मूढ़ कालिदास ने भी भूल से देवी के बीज मंत्र 'ऐं' का उच्चारण कर लिया था।
पञ्चांग अध्ययन के लिए हफ्ते के वार/दिन और उनके देवता:
१. रविवार के देवता हैं शिव।
२. सोमवार की देवि हैं दुर्गा।
३. मंगल के देवता हैं कार्तिकेय।
४. बुध के देवता हैं श्रीविष्णु।
५. गुरु के देवता हैं ब्रह्मा जी।
५. शुक्र के देवता हैं इंद्र।
७. शनि के देवता हैं काल।
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