(गरुड़ पुराण-१/११५/२०)

वश्यश्च पुत्रेऽर्थकरी च विद्या,अरोगिता सज्जनसङ्गतिश्च।
इष्टा च भार्या वशवर्तिनी च,दुःखस्य मूलोद्धरणानि पञ्च॥
(गरुड़ पुराण-१/११५/२०)
अनुकूल पुत्र,अर्थकरी विद्या,आरोग्य शरीर,सत्संगति तथा मनोनुकूल पत्नी-ये पांच पुरुष के दुःख को समूल नष्ट करने में सक्षम हैं।

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