Gita 4.38
Hindi Translation By Swami Ramsukhdas
।।4.38।। इस मनुष्यलोकमें ज्ञानके समान पवित्र करनेवाला निःसन्देह दूसरा कोई साधन नहीं है। जिसका योग भली-भाँति सिद्ध हो गया है, वह (कर्मयोगी) उस तत्त्वज्ञानको अवश्य ही स्वयं अपने-आपमें पा लेता है।
https://www.gurujimaharaj.com/shivpuran-hi/shivpuran-hi-section-4-chapter21-23.htm
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