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Showing posts from April, 2023

Mukti swtah sidh he

https://youtu.be/TjLzKTILVws

dukh Ka karn sanklp

https://youtu.be/OYnQTR9GBKE Dukh Ka karn sanklp  1. Avasyak sanklp  2. Anavasyak sanklp 

Bramh bindu upnishad

https://youtu.be/i07u9Gt2zd0 Two types of mind  1. Visai man  2. Avisai man 

jibh se naam kio jape

https://youtu.be/UIrFW-UQo5I

Kalyan Sahaj he

https://youtu.be/ITD3Fsr_Qbw

भज गोविन्दम्

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भजन गंगा × प्रथम पन्ना home कृष्ण भजन krishna bhajans शिव भजन shiv bhajans हनुमान भजन hanuman bhajans साईं भजन sai bhajans जैन भजन jain bhajans दुर्गा भजन durga bhajans गणेश भजन ganesh bhajans राम भजन raam bhajans गुरुदेव भजन gurudev bhajans विविध भजन miscellaneous bhajans विष्णु भजन vishnu bhajans बाबा बालक नाथ भजन baba balak nath bhajans देश भक्ति भजन patriotic bhajans खाटू श्याम भजन khatu shaym bhajans रानी सती दादी भजन rani sati dadi bhajans बावा लाल दयाल भजन bawa lal dayal bhajans शनि देव भजन shani dev bhajans आज का भजन bhajan of the day भजन जोड़ें add bhajans भज गोविन्दम् भज गोविन्दम् 'आदि शंकराचार्य ' भज गोविन्दं भज गोविन्दं, गोविन्दं भज मूढ़मते। संप्राप्ते सन्निहिते काले, न हि न हि रक्षति डुकृञ् करणे॥१॥ हे मोह से ग्रसित बुद्धि वाले मित्र, गोविंद को भजो, गोविन्द का नाम लो, गोविन्द से प्रेम करो क्योंकि मृत्यु के समय व्याकरण के नियम याद रखने से आपकी रक्षा नहीं हो सकती है॥१॥ मूढ़ जहीहि धनागमतृष्णाम्, कुरु सद्बुद्धिमं मनसि वितृष्णाम्। यल्लभसे निजकर्मोपात्तम्, वित्तं तेन विनो...

ram Sukh das Bhagwan me lgne Ka Upay

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https://youtu.be/1icRyEVyJIk ॥ सन्तवाणी ॥–श्रद्धेय स्वामीजी श्रीरामसुखदासजी महाराज Saturday, July 28, 2018 सत्संगकी आवश्यकता आजकी शुभ तिथि– श्रावण कृष्ण प्रतिपदा, वि.सं.–२०७५, शनिवार   सत्संगकी आवश्यकता प्रत्येक मनुष्यको शास्त्रके विधानके अनुसार कार्य करना चाहिये । भगवान् ,  सन्त-महात्मा और शास्त्र‒ये तीनों निष्पक्ष हैं ,  समतावाले हैं ,  प्राणिमात्रके सुहद् हैं और सबका हित चाहते हैं ;  अतः इनकी बात कभी टालनी नहीं चाहिये । ये हमारेसे कुछ भी नहीं चाहते ,  प्रत्युत केवल हमारा हित करते हैं ।  गोस्वामीजी कहते हैं‒ हेतु रहित  जग  जुग उपकारी । तुम्ह  तुम्हार  सेवक असुरारी ॥ स्वारथ मीत सकल जग माहीं । सपनेहुँ प्रभु  परमारथ  नाहीं ॥                                                     (मानस ७ । ४७ । ३) एक भगवान् और एक भगवान्‌के भक्त‒ये दोनों   निस्वार्थभावसे सबका हित करनेवाले हैं ।  भग...

bhagvan ki prapti

Bhagwan ko apna manna  Sansar ke virakti  https://youtu.be/0GJ3WGw3RcY

बार बार न ही पाईये मनुष्य जनम की मौज (bhartihari krit)

https://youtu.be/Bp138VHF0cQ

tatkal sidhdhiw

https://youtu.be/bwDKh0QBsJE Yogi anubhav se (dhyan se visvas bdhata he)  Aur bhakt ko apna manne Ka visvash karta he ananya se 

Jo brahm he vali aatma, vahi Bhagwan vahi prmattma he sirf naam Ka bhed he

https://youtu.be/jxE4OL9fggc Jo brahm he vali aatma, vahi Bhagwan vahi prmattma he sirf naam Ka bhed he 

manusya jivan ki saphalta

https://youtu.be/nnBNzSKJpCQ

chup sadhan

https://youtu.be/FiUZFs_MrqU 1. Achinty dhyan  2. Mook chinta  Prabhu ke charno me pda rhna he Dyan nhi krna.  Sahaj smadhi >dhyan >shastra adhyan 

naam jap me sanka smadhan

https://youtu.be/ojwpSNZZeIw https://youtu.be/LWz8_Pa03Ik

एक श्लोक सार मंत्र में पूरी रामकथा

॥ एक श्लोक सार मंत्र में पूरी रामकथा ॥ जो लोग इस मंत्र का पाठ रोज करते हैं, उन्हें रामायण पढ़ने के बराबर पुण्य मिलता है। इसे एक श्लोकी रामायण कहते हैं। आदौ राम तपोवनादि गमनं, हत्वा मृगं कांचनम्। वैदीहीहरणं जटायुमरणं, सुग्रीवसंभाषणम्॥ बालीनिर्दलनं समुद्रतरणं, लंकापुरीदाहनम्।  पश्चाद् रावण कुम्भकर्ण हननम्, एतद्धि रामायणम्॥ श्रीराम वनवास गए। स्वर्ण मृग का का वध किया। वैदेही यानी सीताजी का रावण ने हरण कर लिया, रावण के हाथों जटायु ने अपने प्राण गंवाए । श्रीराम और सुग्रीव की मित्रता हुई। बालि का वध किया। समुद्र पार किया। लंकापुरी का दहन किया। इसके बाद रावण और कुंभकर्ण का वध किया। ये रामायण का सार है।

श्री शिव सहस्रनाम स्तोत्रम्

|| श्री शिव सहस्रनाम स्तोत्रम् || ॐ स्थिरः स्थाणुः प्रभुर्भानुः प्रवरो वरदो वरः | सर्वात्मा सर्वविख्यातः सर्वः सर्वकरो भवः || जटी चर्मी शिखण्डी च सर्वाङ्गः सर्वभावनः | हरिश्च हरिणाक्शश्च सर्वभूतहरः प्रभुः || ऊँ नमः शिवाय

स्कन्दपुराण

४/६ (स्कन्दपुराण ब्राह्मखण्ड चातुर्मास्यमाहत्म्य) भगवान् शंकर - पार्वती! भगवान् विष्णुके सहस्रनामोंमें जो सारभूत नाम है, मैं उसीका नित्य-निरंतर चिन्तन करता हूं।मैं राम नाम जपता हूँ और उसीके अंककी मालाके द्वारा गिनती करता हूँ।राम-नाम कोटि मन्त्रोंसे अधिक फल देनेवाला है। दूर्वा दलद्युति तनुं तरुणाब्ज नेत्रं, हेमाम्बरं बर विभूषण भूषिताङ्गम्। कन्दर्प कोटि कमनीय किशोर मूर्तिं, पूर्तिं मनोरथ भुवां भज जानकीशं। दूर्वादल के कोपल के समान नीलवर्ण तथा तरुण कमल के समान रक्तवर्ण नेत्रों वाले, पीताम्बर वस्त्र धारण किए, कोटि कोटि कामदेवों के सदृश किशोर, समस्त कामनाओ को पूर्ण करने वाले जानकीश भगवान श्री रामजी का भजन करें।

BhagavadGita 18 adhay Ka matlab

https://youtu.be/KOt9Ya7Zdeg

अनुलोम विलोम प्राणायाम विधि

🚩12000 साल पुरानी वैदिक क्रोध प्रबंधन चिकित्सा (Anger Management therapy) अनुलोम विलोम प्राणायाम विधि- सुखासन, पद्मासन आदि किसी भी ध्यान मुद्रा में बैठ जाएं। रीढ़ की हड्डी सीधी होनी चाहिए। दाहिने हाथ के अंगूठे का प्रयोग करते हुए दाहिने नथुने को बंद कर लें। साँस बाएं नथुने से 2 सेकंड के लिए। अब दोनों नथुने को ब्लॉक कर दें और 4 सेकंड के लिए सांस रोकें।  **(हृदय रोग, ब्लड प्रेशर के रोगी और गर्भवती महिलायें इस प्राणायाम को करते समय अपनी सांस को रोककर न रखें, सिर्फ सांस लेते और छोड़ते रहें।)  बायीं नासिका को बंद रखें और दायीं नासिका को छोड़ दें। 2 सेकंड के लिए दाएं नथुने से सांस छोड़ें। अब दाएं नथुने से 2 सेकंड के लिए सांस लें। दोनों नासिका छिद्रों को बंद कर लें और 4 सेकंड के लिए सांस को रोकें। दायीं नासिका को बंद रखें और बायीं नासिका को छोड़ दें। 2 सेकंड के लिए बाएं नथुने से सांस छोड़ें। दोनों नासिका छिद्रों को बंद कर लें।  2 सेकंड के लिए सांस को रोक कर रखें। यह एक सिंगल राउंड पूरा करता है। इस बार दाहिनी नासिका से श्वास भरते हुए पुन: चक्र प्रारंभ करें। अधिकतम 10 राउंड के लिए...

ब्राह्मण को क्यों शास्त्रों में कहा गया है देवता

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