भजन गंगा × प्रथम पन्ना home कृष्ण भजन krishna bhajans शिव भजन shiv bhajans हनुमान भजन hanuman bhajans साईं भजन sai bhajans जैन भजन jain bhajans दुर्गा भजन durga bhajans गणेश भजन ganesh bhajans राम भजन raam bhajans गुरुदेव भजन gurudev bhajans विविध भजन miscellaneous bhajans विष्णु भजन vishnu bhajans बाबा बालक नाथ भजन baba balak nath bhajans देश भक्ति भजन patriotic bhajans खाटू श्याम भजन khatu shaym bhajans रानी सती दादी भजन rani sati dadi bhajans बावा लाल दयाल भजन bawa lal dayal bhajans शनि देव भजन shani dev bhajans आज का भजन bhajan of the day भजन जोड़ें add bhajans भज गोविन्दम् भज गोविन्दम् 'आदि शंकराचार्य ' भज गोविन्दं भज गोविन्दं, गोविन्दं भज मूढ़मते। संप्राप्ते सन्निहिते काले, न हि न हि रक्षति डुकृञ् करणे॥१॥ हे मोह से ग्रसित बुद्धि वाले मित्र, गोविंद को भजो, गोविन्द का नाम लो, गोविन्द से प्रेम करो क्योंकि मृत्यु के समय व्याकरण के नियम याद रखने से आपकी रक्षा नहीं हो सकती है॥१॥ मूढ़ जहीहि धनागमतृष्णाम्, कुरु सद्बुद्धिमं मनसि वितृष्णाम्। यल्लभसे निजकर्मोपात्तम्, वित्तं तेन विनो...
https://youtu.be/1icRyEVyJIk ॥ सन्तवाणी ॥–श्रद्धेय स्वामीजी श्रीरामसुखदासजी महाराज Saturday, July 28, 2018 सत्संगकी आवश्यकता आजकी शुभ तिथि– श्रावण कृष्ण प्रतिपदा, वि.सं.–२०७५, शनिवार सत्संगकी आवश्यकता प्रत्येक मनुष्यको शास्त्रके विधानके अनुसार कार्य करना चाहिये । भगवान् , सन्त-महात्मा और शास्त्र‒ये तीनों निष्पक्ष हैं , समतावाले हैं , प्राणिमात्रके सुहद् हैं और सबका हित चाहते हैं ; अतः इनकी बात कभी टालनी नहीं चाहिये । ये हमारेसे कुछ भी नहीं चाहते , प्रत्युत केवल हमारा हित करते हैं । गोस्वामीजी कहते हैं‒ हेतु रहित जग जुग उपकारी । तुम्ह तुम्हार सेवक असुरारी ॥ स्वारथ मीत सकल जग माहीं । सपनेहुँ प्रभु परमारथ नाहीं ॥ (मानस ७ । ४७ । ३) एक भगवान् और एक भगवान्के भक्त‒ये दोनों निस्वार्थभावसे सबका हित करनेवाले हैं । भग...
॥ एक श्लोक सार मंत्र में पूरी रामकथा ॥ जो लोग इस मंत्र का पाठ रोज करते हैं, उन्हें रामायण पढ़ने के बराबर पुण्य मिलता है। इसे एक श्लोकी रामायण कहते हैं। आदौ राम तपोवनादि गमनं, हत्वा मृगं कांचनम्। वैदीहीहरणं जटायुमरणं, सुग्रीवसंभाषणम्॥ बालीनिर्दलनं समुद्रतरणं, लंकापुरीदाहनम्। पश्चाद् रावण कुम्भकर्ण हननम्, एतद्धि रामायणम्॥ श्रीराम वनवास गए। स्वर्ण मृग का का वध किया। वैदेही यानी सीताजी का रावण ने हरण कर लिया, रावण के हाथों जटायु ने अपने प्राण गंवाए । श्रीराम और सुग्रीव की मित्रता हुई। बालि का वध किया। समुद्र पार किया। लंकापुरी का दहन किया। इसके बाद रावण और कुंभकर्ण का वध किया। ये रामायण का सार है।
४/६ (स्कन्दपुराण ब्राह्मखण्ड चातुर्मास्यमाहत्म्य) भगवान् शंकर - पार्वती! भगवान् विष्णुके सहस्रनामोंमें जो सारभूत नाम है, मैं उसीका नित्य-निरंतर चिन्तन करता हूं।मैं राम नाम जपता हूँ और उसीके अंककी मालाके द्वारा गिनती करता हूँ।राम-नाम कोटि मन्त्रोंसे अधिक फल देनेवाला है। दूर्वा दलद्युति तनुं तरुणाब्ज नेत्रं, हेमाम्बरं बर विभूषण भूषिताङ्गम्। कन्दर्प कोटि कमनीय किशोर मूर्तिं, पूर्तिं मनोरथ भुवां भज जानकीशं। दूर्वादल के कोपल के समान नीलवर्ण तथा तरुण कमल के समान रक्तवर्ण नेत्रों वाले, पीताम्बर वस्त्र धारण किए, कोटि कोटि कामदेवों के सदृश किशोर, समस्त कामनाओ को पूर्ण करने वाले जानकीश भगवान श्री रामजी का भजन करें।
🚩12000 साल पुरानी वैदिक क्रोध प्रबंधन चिकित्सा (Anger Management therapy) अनुलोम विलोम प्राणायाम विधि- सुखासन, पद्मासन आदि किसी भी ध्यान मुद्रा में बैठ जाएं। रीढ़ की हड्डी सीधी होनी चाहिए। दाहिने हाथ के अंगूठे का प्रयोग करते हुए दाहिने नथुने को बंद कर लें। साँस बाएं नथुने से 2 सेकंड के लिए। अब दोनों नथुने को ब्लॉक कर दें और 4 सेकंड के लिए सांस रोकें। **(हृदय रोग, ब्लड प्रेशर के रोगी और गर्भवती महिलायें इस प्राणायाम को करते समय अपनी सांस को रोककर न रखें, सिर्फ सांस लेते और छोड़ते रहें।) बायीं नासिका को बंद रखें और दायीं नासिका को छोड़ दें। 2 सेकंड के लिए दाएं नथुने से सांस छोड़ें। अब दाएं नथुने से 2 सेकंड के लिए सांस लें। दोनों नासिका छिद्रों को बंद कर लें और 4 सेकंड के लिए सांस को रोकें। दायीं नासिका को बंद रखें और बायीं नासिका को छोड़ दें। 2 सेकंड के लिए बाएं नथुने से सांस छोड़ें। दोनों नासिका छिद्रों को बंद कर लें। 2 सेकंड के लिए सांस को रोक कर रखें। यह एक सिंगल राउंड पूरा करता है। इस बार दाहिनी नासिका से श्वास भरते हुए पुन: चक्र प्रारंभ करें। अधिकतम 10 राउंड के लिए...