स्कन्दपुराण

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(स्कन्दपुराण ब्राह्मखण्ड चातुर्मास्यमाहत्म्य)
भगवान् शंकर -

पार्वती! भगवान् विष्णुके सहस्रनामोंमें जो सारभूत नाम है, मैं उसीका नित्य-निरंतर चिन्तन करता हूं।मैं राम नाम जपता हूँ और उसीके अंककी मालाके द्वारा गिनती करता हूँ।राम-नाम कोटि मन्त्रोंसे अधिक फल देनेवाला है।


दूर्वा दलद्युति तनुं तरुणाब्ज नेत्रं, हेमाम्बरं बर विभूषण भूषिताङ्गम्।
कन्दर्प कोटि कमनीय किशोर मूर्तिं, पूर्तिं मनोरथ भुवां भज जानकीशं।

दूर्वादल के कोपल के समान नीलवर्ण तथा तरुण कमल के समान रक्तवर्ण नेत्रों वाले, पीताम्बर वस्त्र धारण किए, कोटि कोटि कामदेवों के सदृश किशोर, समस्त कामनाओ को पूर्ण करने वाले जानकीश भगवान श्री रामजी का भजन करें।

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