राम ही शिव हैं और शिव ही राम हैं।
राम एव हरो ज्ञेयः शिव एव रघूत्तमः ।
उभयोर्नान्तरं ज्ञेयं भेददृं नारकी नरः ॥
- आनंदरामायण, मनोहरकाण्ड ७/१०५
राम ही शिव हैं और शिव ही राम हैं। इन दोनों में कोई अंतर नहीं है। जो प्राणी इनमें कोई भेदभाव मानता है, वह नरकगामी होता है।
ता पर मैं रघुबीर दोहाई। जानउँ नहिं कछु भजन उपाई॥
सेवक सुत पति मातु भरोसें। रहइ असोच बनइ प्रभु पोसें॥
उस पर हे रघुवीर! मैं आपकी दुहाई करके कहता हूँ कि मैं भजन-साधन कुछ नहीं जानता।सेवक स्वामी के और पुत्र माता के भरोसे निश्चिंत रहता है। प्रभु को सेवक का पालन-पोषण करते ही बनता है ।
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