शुक्रनीति ४.३.६६

पृथक् पृथक् क्रियाभिर्हि कलाभेदस्तु जायते ।
यां यां कलां समाश्रित्य तन्नाम्ना जातिरुच्यते ॥

- शुक्रनीति ४.३.६६

कलाओं का आश्रय लेकर लोग जीविका चलाते हैं, उस कला के नाम से उनकी जो पहचान होती है, उसे जाति कहते हैं।

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