नाम जपो पर राम का होकर

बिगरी जनम अनेक को, सुधरै अबहीं आजु।

होहि राम को नाम जपु, तुलसी तजि कुसमाजु॥

तुलसी कहते हैं कि तू कुसंगति को और चित्त के सारे बुरे विचारों को त्यागकर राम का बन जा और उनके नाम का जप कर। ऐसा करने से तेरी अनेक जन्मों की बिगड़ी हुई स्थिति अभी सुधर सकती है।



https://youtu.be/AMB9v_QV1M4

 

राम नाम जपि जीहँ जन, भए सुकृत सुखसालि। 

तुलसी इहाँ जो आलसी, गयो आजु की कालि॥ 


तुलसीदास कहते हैं कि जीभ से राम नाम का जप करके लोग पुण्यात्मा और परम सुखी हो गए; परंतु इस नाम जप में जो आलस्य करते हैं, उन्हें तो आज या कल नष्ट ही हुआ समझो।



भजन बिनु कूकर−सूकर−जैसो।

जैसैं घर बिलाव के मूसा, रहत बिषय−बस वैसौ॥

बग−बगुली अरु गीध−गीधिनी, आइ जनम लियौ तैसौ।

उनहू कैं गृह, सुत, दारा हैं, उन्हैं भेद कहु कैसौ?

जीव मारि कै उदर भरत हैं, तिन कौ लेखौ ऐसौ।

सूरदास भगवंत−भजन बिनु, मनौ ऊँट−बृष−भैंसौ॥

भजन किए बिना तो कुत्ते या सूअर के समान मनुष्य-जीवन है। जैसे बिल्लीवाले घर में चूहे (सदा मृत्यु के ग्रास बने रहते हैं), वैसे ही (मनुष्य भी) विषय−वासना के वश हुआ मृत्यु के चंगुल में रहता है। जैसे बगुले−बगुली और गिद्ध−गिद्धनी जन्म लेते हैं, वैसे ही उसने भी पृथ्वी पर व्यर्थ जन्म लिया है। बगुले−गिद्ध आदि के भी घर, पुत्र, स्त्री आदि तो हैं ही; फिर मनुष्य का उनसे किस बात में भेद कहा जाए। जो लोग दूसरे जीवों को मार कर अपना पेट भरते हैं, उनकी गणना तो बगुले−गिद्ध में ही है। सूरदास कहते हैं−भगवान का भजन किए बिना तो मनुष्य ऊँट, बैल और भैंसे के समान ही है।

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