राम नाम विलक्षण

तेरे भावे कछु करौ, भलो बुरो संसार।
नारायण तू बैठि के, आपनो भवन बुहार।।

- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (32)

दुनिया में जो चाहे वो करे [चाहे अच्छा बुरा बुरा], न तो हम अच्छे रहेंगे न बुरे का, न ही किसी की सुनेंगे। श्री नारायण स्वामी कहते हैं अरे मन तू अपने बारे में सोच यानी तू तो केवल श्री राधा कृष्ण का ध्यान करें।
https://youtu.be/1uOuWcPiMMw

लव निमेष परमानु जुग बरष कलप सर चंड।
भजसि न मन तेहि राम को कालु जासु कोदंड॥

लव, निमेष, परमाणु, वर्ष, युग और कल्प जिनके प्रचंड बाण हैं और काल जिनका धनुष है, हे मन! तू उन राम को क्यों नहीं भजता?

दो० - श्री रघुबीर प्रताप ते सिंधु तरे पाषान।
ते मतिमंद जे राम तजि भजहिं जाइ प्रभु आन॥ 3॥

श्री रघुवीर के प्रताप से पत्थर भी समुद्र पर तैर गए। ऐसे राम को छोड़कर जो किसी दूसरे स्वामी को जाकर भजते हैं वे (निश्चय ही) मंदबुद्धि हैं।॥3॥

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