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Showing posts from August, 2023

राम नाम सुख दाई सत्संग

https://youtube.com/watch?v=Ag8tWdGzbYg&si=VCQN4nK8t_6tOKBb

कर्म योग से परमात्मा कि प्राप्ति(सम भाव स्थिति)

https://youtube.com/watch?v=y9YHNApkaiM&si=85lyF0tq4Txq8Vh-

माँ सारदा वाणी(मन को वस मे करना )

https://youtube.com/watch?v=zngvogdIpwU&si=VXlA1gP1X9JCHvoF https://youtube.com/watch?v=CFZ5I1wuIb4&si=anusRqdxupBhtrgu Mn ko control Dhyan aur jap

हे उमा! राम बड़े ही कोमल हृदय और करुणा की खान हैं।

खल मनुजाद द्विजामिष भोगी। पावहिं गति जो जाचत जोगी॥ उमा राम मृदुचित करुनाकर। बयर भाव सुमिरत मोहि निसिचर॥ ब्राह्मणों का मांस खानेवाले वे नरभोजी दुष्ट राक्षस भी वह परम गति पाते हैं, जिसकी योगी भी याचना किया करते हैं  हे उमा! राम बड़े ही कोमल हृदय और करुणा की खान हैं। राक्षस मुझे वैरभाव से ही सही, स्मरण तो करते ही हैं। केवट निसिचर बिहग मृग किए साधु सनमानि। तुलसी रघुबर की कृपा सकल सुमंगल खानि॥ तुलसीदासजी कहते हैं कि श्रीरघुनाथजीकी कृपा सब सुमंगलोंकी खान है, उस रामकृपाने केवट, राक्षस (विभीषण), पक्षी (जटायु) व बंदर भालुओं आदि को भी सम्मान देकर साधु बना दिया॥ न जानन् जानकीजानौ रामे तत्त्वम् अपि प्रभौ । धिक् कुर्याद् यमदूतान् स यो नरस्तत्त्व मीहते ॥ Sadashiva says:-Not knowing bhagwan Sita Ram but still someone who strives for the Absolute Truth are condemned by the messengers of Yamaraja and yamaraja himself. ~Brahma Ramayan सदाशिव कहते हैं: -भगवान सीता राम को न जानने के बावजूद भी जो परम सत्य के लिए प्रयास करता है, उसकी यमराज के दूतों और स्वयं यमराज द्वारा निंदा की जाती है।

best yoga

https://www.india.com/webstories/lifestyle/10-powerful-yoga-exercises-for-a-healthy-heart-6256269/

याद को मिटाना ( महिला को भूलना)

https://youtube.com/watch?v=kuH-PzIdF6o&si=z19sjcNmWYsjAvNr नाम जप से संभव

राम भरोसो राम बल

राम भरोसो राम बल, राम नाम बिस्वास।  सुमिरत सुभ मंगल कुसल, मांगत तुलसीदास॥  तुलसीदास जी यही माँगते हैं कि मेरा एक मात्र राम पर ही भरोसा रहे, राम ही का बल रहे और जिसके स्मरण मात्र ही से शुभ, मंगल और कुशल की प्राप्ति होती है, उस राम नाम में ही विश्वास रहे।  राम नाम रति राम गति, राम नाम बिस्वास।  सुमिरत सुभ मंगल कुसल, दुहुँ दिसि तुलसीदास॥  तुलसीदास कहते हैं कि जिसका राम नाम में प्रेम है, राम ही जिसकी एकमात्र गति है और राम नाम में ही जिसका विश्वास है, उसके लिए राम नाम का स्मरण करने से ही दोनों ओर (इस लोक में और परलोक में) शुभ, मंगल और कुशल है। दोहा – एक भरोसो एक बल एक आस बिस्वास । रामरूप स्वाती जलद चातक तुलसीदास ॥ १५॥   तुलसीदासजी कहते हैं कि जिसको एकमात्र (भगवान का ही) आश्रय है, एकमात्र ( भगवान् ‌का ही जिसको) बल है, एकमात्र (उन्हीं से जिसको) आशा है और (उन्हीं का) भरोसा है, (जिसके लिये) भगवान्‌ श्रीरामचन्द्रजीका रूप ही स्वाती नक्षत्र का मेघ है और (जो स्वयं) चातक (की भाँति उन्हीं की ओर देख रहा है,) (वह संत है) ॥ १५ ॥

विनयपत्रिका( पद संख्या-६४)

विनयपत्रिका( पद संख्या-६४)  बंदौ रघुपति करुना-निधान।         जाते छूटै भव-भेद-ग्यान ॥ १ ॥  रघुबंस-कुमुद-सुखप्रद निसेस।        सेवत पद-पंकज अज महेस ॥ २ ॥  निज भक्त-ह्रदय-पाथोज-भृंग।        लावन्य बपुष अगनित अनंग ॥ ३ ॥  अति प्रबल मोह-तम-मारतंड।        अग्यान-गहन-पावक प्रचंड ॥ ४ ॥  अभिमान-सिंधु-कुंभज उदार।       सुररंजन,भंजन भूमिभार ॥ ५ ॥  रागादि-सर्पगन-पन्नगारि।      कंदर्प-नाग-मृगपति,मुरारि ॥ ६ ॥  भव-जलधि-पोत चरनारबिंद।       जानकी-रवन आनंद-कंद ॥ ७ ॥  हनुमंत-प्रेम-बापी-मराल।       निष्काम कामधुक गो दयाल ॥ ८ ॥  त्रैलोक-तिलक,गुनगहन राम।       कह तुलसिदास बिश्राम-धाम ॥ ९ ॥  शब्दार्थ:- निसेस = (निशा + ईश ) चन्द्रमा । अनंग = कामदेव । मारतंड = सूर्य ।  सुर-रंजन = देवताओंको सुख देनेवाले । कंदर्प=काम । नाग =हाथी । पोत = नौका । वापी = बावली । भावार्थ- मैं करुणानिधान...

भगवान शिव कौन हैं |

|| आइए जानने का प्रयास करें, भगवान शिव कौन हैं || आदि शंकराचार्य के अनुसार- अजं शाश्वतं कारणं कारणानां शिवं केवलं भासकं भासकानाम् तुरीयं तमःपारमाद्यन्तहीनं प्रपद्ये परं पावनं द्वैतहीनम् ..!! "वह जो पारलौकिक अस्तित्व है, शाश्वत और अपरिवर्तनीय, अंतिम स्रोत है जहाँ से सभी कारण उत्पन्न होते हैं। वह जो पूरे ब्रह्मांड को रोशन करता है, अस्तित्व की तीन अवस्थाओं की सीमाओं को पार करता है, जो न तो शुरुआत है और न ही अंत है। वह जो अज्ञानता और संघर्ष को दूर करता है, जो द्वंद्व के सभी रूपों से परे विद्यमान है, वही शिव है।  इस दिव्य सत्व ने इच्छा (काम) और समय (काल) पर भी विजय प्राप्त की है। उन्हें एक भावुक प्रेमी के रूप में सम्मानित किया जाता है, और उनकी पत्नी शक्ति के साथ, वे ब्रह्मांडीय मिलन का प्रतीक हैं। उन्हें ब्रह्मांडीय नर्तक (नटराज), एक योगी के रूप में भी चित्रित किया गया है, और वे पुरुष और महिला दोनों ऊर्जाओं (अर्धनारीश्वर) का प्रतीक हैं, वही शिव है।" भगवान शिव वास्तव में कई नामों से जुड़े हैं, जिनमें से प्रत्येक एक अद्वितीय रूप और पहलू का प्रतिनिधित्व करता है। उनके हजारों र...

तीनो कर्मों से मुक्त होने का उपाय

https://youtube.com/watch?v=yZsGjv5F1LQ&feature=share7

हनुमान बाहुक्

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Sk me  -  Stuti  -  हनुमान बाहुक पाठ हिंदी में अर्थ सहित हनुमान बाहुक पाठ हिंदी में अर्थ सहित June 6, 2023   by  संत हनुमान बाहुक पाठ  को लोग  हनुमान बाहुक चालीसा, श्री हनुमान बाहुक, हनुमान बाहुक मंत्र, श्री हनुमान बाहुक पाठ, बजरंग बाहुक पाठ  के नाम से बी जानते हे। संवत् 1664 विक्रमाब्द के लगभग गोस्वामी तुलसीदासजी की बाहुओं में वात-व्याधि की गहरी पीड़ा उत्पन्न हुई थी और फोड़े-फुंसियों के कारण सारा शरीर वेदना का स्थान – सा बन गया था। औषध, यन्त्र, मन्त्र, त्रोटक आदि अनेक उपाय किये गये, किन्तु घटने के बदले रोग दिनोंदिन बढ़ता ही जाता था। असहनीय कष्टों से हताश होकर अन्त में उसकी निवृत्ति के लिये गोस्वामी तुलसीदासजी ने हनुमान् जी की वन्दना आरम्भ की। अंजनीकुमार की कृपा से उनकी सारी व्यथा नष्ट हो गयी।  यह वही 44 पद्यों का ‘हनुमानबाहुक’ नामक प्रसिद्ध स्तोत्र है।  असंख्य हरिभक्त श्रीहनुमान् जी के उपासक निरन्तर इसका पाठ करते हैं और अपने वांछित मनोरथ को प्राप्त करके प्रसन्न होते हैं। संकट के समय इस सद्यः फलदायक स्तोत्र का श्रद्धा-विश्वासपूर्वक ...