राम भरोसो राम बल

राम भरोसो राम बल, राम नाम बिस्वास। 

सुमिरत सुभ मंगल कुसल, मांगत तुलसीदास॥ 

तुलसीदास जी यही माँगते हैं कि मेरा एक मात्र राम पर ही भरोसा रहे, राम ही का बल रहे और जिसके स्मरण मात्र ही से शुभ, मंगल और कुशल की प्राप्ति होती है, उस राम नाम में ही विश्वास रहे।



 राम नाम रति राम गति, राम नाम बिस्वास। 

सुमिरत सुभ मंगल कुसल, दुहुँ दिसि तुलसीदास॥ 

तुलसीदास कहते हैं कि जिसका राम नाम में प्रेम है, राम ही जिसकी एकमात्र गति है और राम नाम में ही जिसका विश्वास है, उसके लिए राम नाम का स्मरण करने से ही दोनों ओर (इस लोक में और परलोक में) शुभ, मंगल और कुशल है।


दोहा –

एक भरोसो एक बल एक आस बिस्वास ।

रामरूप स्वाती जलद चातक तुलसीदास ॥ १५॥

 
तुलसीदासजी कहते हैं कि जिसको एकमात्र (भगवान का ही) आश्रय है, एकमात्र ( भगवान् ‌का ही जिसको) बल है, एकमात्र (उन्हीं से जिसको) आशा है और (उन्हीं का) भरोसा है, (जिसके लिये) भगवान्‌ श्रीरामचन्द्रजीका रूप ही स्वाती नक्षत्र का मेघ है और (जो स्वयं) चातक (की भाँति उन्हीं की ओर देख रहा है,) (वह संत है) ॥ १५ ॥

Comments

Popular posts from this blog

धर्म के दश लक्षण (मनु के अनुसार)

शास्त्र

ब्राह्मण के नौ गुण क्या होते हैं