नाम ही परम गति हैं

न नाम सदृशं ज्ञानं न नाम सदृशं व्रतं।
न नाम सदृशं ध्यानं, न नाम सदृशं फलं॥

नाम के समान न ज्ञान है, न व्रत है, न ध्यान है, न फल है न दान है, न शम है, न पुण्य है और न कोई आश्रय है। नाम ही परम मुक्ति हैं, नाम ही परम गति हैं..!!

माता रामो मत्पिता रामचन्द्रः। स्वामी रामो मत्सखा रामचन्द्रः।
सर्वस्वं मे रामचन्द्रो दयालुर्नान्यं जाने नैव जाने न जाने॥
श्रीराम मेरी माता है, श्रीराम ही मेरे पिता हैं, राम स्वामी हैं और राम ही मेरे सखा हैं। दयामय रामचन्द्र ही मेरे सर्वस्व हैं, उनके सिवा और किसी को मैं नहीं जानता॥

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