अमृत मय राम राम

https://youtu.be/molaXRPGInE?si=TLbanjXy2jZaiHp-



चौपाई
स्वाद तोष सम सुगति सुधा के। कमठ सेष सम धर बसुधा के॥
जन मन मंजु कंज मधुकर से। जीह जसोमति हरि हलधर से॥

भावार्थ-
ये सुंदर गति (मोक्ष) रूपी अमृत के स्वाद और तृप्ति के समान हैं, कच्छप और शेष के समान पृथ्वी के धारण करनेवाले हैं, भक्तों के मनरूपी सुंदर कमल में विहार करनेवाले भौंरे के समान हैं और जीभरूपी यशोदा के लिए कृष्ण और बलराम के समान हैं।

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