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Showing posts from November, 2023

॥विष्णोषोडशनामस्तोत्रं॥

॥विष्णोषोडशनामस्तोत्रं॥ ॥परम् सौभाग्यदायी भगवान विष्णु के सोलह (16) नाम॥ औषधे चिन्तयेद विष्णुं भोजने च जनार्दनं। शयने पद्मनाभं च विवाहे च प्रजापतिम॥ युद्धे चक्रधरं देवं प्रवासे च त्रिविक्रमं। नारायणं तनुत्यागे श्रीधरं प्रियसंगमे॥ दु:स्वप्ने स्मर गोविन्दं संकटे मधुसूदनम। कानने नारसिंहं च पावके जलशायिनम॥ जलमध्ये वराहं च पर्वते रघुनंदनम। गमने वामनं चैव सर्वकार्येषु माधवं॥ षोडश-एतानि नामानि प्रातरुत्थाय य: पठेत। सर्वपाप विनिर्मुक्तो विष्णुलोके महीयते॥ १-औषधि लेते समय जपें–विष्णु। २-अन्न ग्रहण करते समय जपें–जनार्दन। ३-शयन करते समय जपें–पद्मनाभ। ४-विवाह के समय जपें–प्रजापति। 5-युद्ध के समय–चक्रधर (श्रीकृष्ण का एक नाम)॥ ६-यात्रा के समय जपें–त्रिविक्रम (प्रभु वामन का एक नाम)॥ ७-शरीर त्यागते समय जपें–नारायण (विष्णु के एक अवतार का नाम नर और नारायण)॥ ८-पत्नी के साथ जपें–श्रीधर। ९-नींद में बुरे स्वप्न आते समय जपें–गोविंद (श्रीकृष्ण का एक नाम)॥ १०-संकट के समय जपें–मधुसूदन। ११-जंगल में संकट के समय जपें-नृसिंह (विष्णु के एक अवतार नृसिंह भगवान)॥ १२-अग्नि के संकट के समय जपें-जलाशयी (जल में शयन करने वाल...

चक्र का ज्ञान

ये सब सोसल मीडीया पर जरूर है लेकिन ग्रंथ शास्त्र ज्ञान है, कृपया पढ़ने वाले बच्चे अवश्य सेव कर लें  गुरू तत्व: १. मूलाधार चक्र : यह शरीर का पहला चक्र है। गुदा और लिंग के बीच चार पंखुरियों वाला यह आधार चक्र है। ९९.९% लोगों की चेतना इसी चक्र पर अटकी रहती है और वे इसी चक्र में रहकर मर जाते हैं। जिनके जीवन में भोग, संभोग और निद्रा की प्रधानता है, उनकी ऊर्जा इसी चक्र के आसपास एकत्रित रहती है। मंत्र : लं कैसे जाग्रत करें : मनुष्य तब तक पशुवत है, जब तक कि वह इस चक्र में जी रहा है.! इसीलिए भोग, निद्रा और संभोग पर संयम रखते हुए इस चक्र पर लगातार ध्यान लगाने से यह चक्र जाग्रत होने लगता है। इसको जाग्रत करने का दूसरा नियम है यम और नियम का पालन करते हुए साक्षी भाव में रहना। प्रभाव : इस चक्र के जाग्रत होने पर व्यक्ति के भीतरवीरता, निर्भीकता और आनंद का भाव जाग्रत हो जाता है। सिद्धियां प्राप्त करने के लिए वीरता, निर्भीकता और जागरूकता का होना जरूरी है। २. स्वाधिष्ठान चक्र - यह वह चक्र लिंग मूल से चार अंगुल ऊपर स्थित है, जिसकी छ: पंखुरियां हैं। अगर आपकी ऊर्जा इस चक्र पर ही एकत्रित है, वह आपके जीवन म...

भगवान केवल चाह से मिलते है

https://youtu.be/-NgbFQdbr0A?si=cQPiGv1wdXzzL5Te मो सम कौन कुटिल खल कामी। तुम सौं कहा छिपी करुणामय, सबके अंतरजामी। जो तन दियौ ताहि विसरायौ, ऐसौ नोन-हरामी। भरि भरि द्रोह विषै कौं धावत, जैसे सूकर ग्रामी। सुनि सतसंग होत जिय आलस, विषियिनि सँग विसरामी। श्रीहरि-चरन छाँड़ि बिमुखनि की निसि-दिन करत गुलामी। पापी परम, अधम, अपराधी, सब पतितनि मैं नामी। सूरदास प्रभु अधम उधारन सुनियै श्रीपति स्‍वामी।।।148।।

नाम जप कैसे करे और प्रभाव

https://youtu.be/Juvmlcxv1UU?si=teZOS-FoCldfK96K

दुःख क्यों आते है ।

https://youtu.be/bsc6H6CiJgc?si=7L60H6q7IOVuwPie

किस रोग में कौन सा आसन करें

किस रोग में कौन सा आसन करें, एक बार पोस्ट पढ़े और इसे सेव करके सुरक्षित कर लें 🙏 ◆ पेट की बिमारियों में- उत्तानपादासन, पवनमुक्तासन, वज्रासन, योगमुद्रासन, भुजंगासन, मत्स्यासन। ◆ सिर की बिमारियों में- सर्वांगासन, शीर्षासन, चन्द्रासन। ◆ मधुमेह- पश्चिमोत्तानासन, नौकासन, वज्रासन, भुजंगासन, हलासन, शीर्षासन। ◆ वीर्यदोष– सर्वांगासन, वज्रासन, योगमुद्रा। ◆ गला- सुप्तवज्रासन, भुजंगासन, चन्द्रासन। ◆ आंखें- सर्वांगासन, शीर्षासन, भुजंगासन। ◆ गठिया– पवनमुक्तासन, पद्मासन, सुप्तवज्रासन, मत्स्यासन, उष्ट्रासन। ◆ नाभि- धनुरासन, नाभि-आसन, भुजंगासन। ◆ गर्भाशय– उत्तानपादासन, भुजंगासन, सर्वांगासन, ताड़ासन, चन्द्रानमस्कारासन। ◆ कमर दर्द – हलासन, चक्रासन, धनुरासन, भुजंगासन। ◆ फेफड़े- वज्रासन, मत्स्यासन, सर्वांगासन। ◆ यकृत- लतासन, पवनमुक्तासन, यानासन। ◆ गुदा,बवासीर,भंगदर आदि में- उत्तानपादासन, सर्वांगासन, जानुशिरासन, यानासन। ◆ दमा- सुप्तवज्रासन, मत्स्यासन, भुजंगासन। ◆ गैस– पवनमुक्तासन, जानुशिरासन, योगमुद्रा, वज्रासन। ◆ जुकाम– सर्वांगासन, हलासन, शीर्षासन। ◆ मानसिक शांति के लिए– सिद्धासन, योगासन,...

राम नाम का महत्व क्या है?

राम नाम का महत्व क्या है?  चरितं रघुनाथस्य शतकोटिप्रविस्तरम् ।  एकैकमक्षरं पुंसां महापातकनाशनम् ॥  राम नाम स्मरण करने मात्र से हृदय की मलीनता दूर होती, गुरुजनो का वाक्य है कि पाप करने वाला व्यक्ति जब राम नाम का सहारा लेता है तो पाप वह अगर ना भी छोड़ पाये तो पाप एक दिन उसको स्वयं छोड़ देते है,  दैहिक, वैदिक और भौतिक इन त्रयतापों को दूर करने हेतु राम नाम सुलभ साधन है। अखिल विश्व में सर्वश्रेष्ठ एवं ग्राह्य वस्तु राम नाम सारे वेदों और शास्त्रों का सार है। संतों, पुराणों और उपनिषदों ने राम नाम के असीम प्रभाव का गान किया है। राम नाम ही तीनों लोकों में दिव्य शक्तिपुंज है। गोस्वामी तुलसीदास जी श्री रामचरित मानस में स्पष्ट वर्णन किया है कि राम नाम ही महामंत्र है। भगवान शंकर का कथन है कि संसार में महामंत्रों की संख्या सात करोड़ है पर इनमें यह दो अक्षर का राम नाम ही प्रधान है। सप्तकोटी महामंत्राश्चित विभ्रम कारकाः  एक एव परो मंत्रराम इत्यक्षरद्वयम।। अर्थात् इस दुनिया में सात करोड़ मंत्र हैं। वे चित्त को भ्रमित करने वाले हैं। यह दो अक्षरों वाला राम नाम परम मंत्र हैयह सब मं...

धर्म अर्थ काम मोक्ष का मतलब

https://youtu.be/eP4le7oUm4I?si=Q296Sk-PIlpFdlEG