राम नाम का महत्व क्या है?
राम नाम का महत्व क्या है?
चरितं रघुनाथस्य शतकोटिप्रविस्तरम् ।
एकैकमक्षरं पुंसां महापातकनाशनम् ॥
राम नाम स्मरण करने मात्र से हृदय की मलीनता दूर होती, गुरुजनो का वाक्य है कि पाप करने वाला व्यक्ति जब राम नाम का सहारा लेता है तो पाप वह अगर ना भी छोड़ पाये तो पाप एक दिन उसको स्वयं छोड़ देते है,
दैहिक, वैदिक और भौतिक इन त्रयतापों को दूर करने हेतु राम नाम सुलभ साधन है। अखिल विश्व में सर्वश्रेष्ठ एवं ग्राह्य वस्तु राम नाम सारे वेदों और शास्त्रों का सार है। संतों, पुराणों और उपनिषदों ने राम नाम के असीम प्रभाव का गान किया है।
राम नाम ही तीनों लोकों में दिव्य शक्तिपुंज है। गोस्वामी तुलसीदास जी श्री रामचरित मानस में स्पष्ट वर्णन किया है कि राम नाम ही महामंत्र है। भगवान शंकर का कथन है कि संसार में महामंत्रों की संख्या सात करोड़ है पर इनमें यह दो अक्षर का राम नाम ही प्रधान है।
सप्तकोटी महामंत्राश्चित विभ्रम कारकाः
एक एव परो मंत्रराम इत्यक्षरद्वयम।।
अर्थात् इस दुनिया में सात करोड़ मंत्र हैं। वे चित्त को भ्रमित करने वाले हैं। यह दो अक्षरों वाला राम नाम परम मंत्र हैयह सब मंत्रों में श्रेष्ठ मंत्र हैसब मंत्र इसके अंतर्गत आ जाते हैंकोई भी मंत्र बाहर नहीं रहता । सब शक्तियां इसके अन्तर्गत है
“ राम राम” केवल दो बार ही बोला जाता है किंतु क्यूँ?
एक बार या तीन बार क्यों नही बोलते ? दो बार "राम राम" बोलने के पीछे बड़ा गूढ़ रहस्य है क्योंकि यह आदि काल से ही चला आ रहा है... हिन्दी की शब्दावली में 'र' सत्ताइसवां शब्द है, 'आ' की मात्रा दूसरा और 'म' पच्चीसवां शब्द है.... अब तीनो अंको का योग करें तो 27+2+25= 54, अर्थात एक "राम" का योग 54 होता है
इसी प्रकार दो "राम राम" का कुल योग 108 होगा। हम जब कोई जाप करते हैं तो 108 मनके की माला गिनकर करते हैंसिर्फ 'राम राम' कह देने से ही पूरी माला का जाप हो जाता है ..
चलिए राम राम कहते है 🙏🏻🌸
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