भगवान केवल चाह से मिलते है

https://youtu.be/-NgbFQdbr0A?si=cQPiGv1wdXzzL5Te



मो सम कौन कुटिल खल कामी।
तुम सौं कहा छिपी करुणामय, सबके अंतरजामी।
जो तन दियौ ताहि विसरायौ, ऐसौ नोन-हरामी।
भरि भरि द्रोह विषै कौं धावत, जैसे सूकर ग्रामी।
सुनि सतसंग होत जिय आलस, विषियिनि सँग विसरामी।
श्रीहरि-चरन छाँड़ि बिमुखनि की निसि-दिन करत गुलामी।
पापी परम, अधम, अपराधी, सब पतितनि मैं नामी।
सूरदास प्रभु अधम उधारन सुनियै श्रीपति स्‍वामी।।।148।।

Comments

Popular posts from this blog

धर्म के दश लक्षण (मनु के अनुसार)

शास्त्र

ब्राह्मण के नौ गुण क्या होते हैं