"रामनाम्न: परो मंत्रो न भूतो न भविष्यति।" 'राम' इस शब्द में रकार रसातल लोक से, अकार भूमंडल से एवं मकार मह:लोक से आया है, इसी कारण यह त्रिवर्णात्मक राममन्त्र है। श्रीरामचंद्र जी रकार के द्वारा भवसिंधु से अपने भक्तों की रक्षा करते हैं। अकार से भक्तों को

"रामनाम्न: परो मंत्रो न भूतो न भविष्यति।" 

'राम' इस शब्द में रकार रसातल लोक से, अकार भूमंडल से एवं मकार मह:लोक से आया है, इसी कारण यह त्रिवर्णात्मक राममन्त्र है। श्रीरामचंद्र जी रकार के द्वारा भवसिंधु से अपने भक्तों की रक्षा करते हैं। अकार से भक्तों को अतिशय सौख्य (सुख) प्रदान करते हैं। मकार से भक्तों की कामना पूर्ण करते हैं और बाधाएं दूर करते हैं। एकमात्र यह राम नाम ही तारक है, यह मनुष्यों को संसार रूपी समुद्र से तार सकता है। इसीलिए मरते समय कान में राम नाम का उपदेश तथा मृत्यु के बाद राम नाम का कीर्तन किया जाता है।

स्वयं शिवजी, हनुमानजी, नारदजी और पार्वतीजी इस राम नाम का जप करते हैं।🙏-आनन्द रामायण

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