त्रयोदशाक्षर मन्त्र विजयमन्त्र 'मन्त्रराज' कहा जाता है।
श्रीरामेति पदं चोक्त्वा जय राम ततः परम् ।
जय द्वयं वदेत् प्राज्ञो रामेति मन्त्रराजकः ॥
अर्थात् 'श्रीराम' कहने के बाद 'जय राम' कहना चाहिये। तत्पश्चात् दो बार 'जय-जय' बोलकर 'राम' बोलना चाहिये। यही त्रयोदशाक्षर मन्त्र विजयमन्त्र 'मन्त्रराज' कहा जाता है।
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