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Showing posts from July, 2022

रामचरितमानस की स्तुतियाँ

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रामचरितमानस की स्तुतियाँ संत तुलसीदास रचित रामचरितमानस में कई स्तुतियाँ हैं. जितनी मैं जानता हूँ, उतनी यहाँ प्रस्तुत है. कोई छूट गई हो तो आप अवश्य बताए. 1. बालकाण्ड में दोहा #191 के बाद छन्द : * भए प्रगट कृपाला दीनदयाला कौसल्या हितकारी। हरषित महतारी मुनि मन हारी अद्भुत रूप बिचारी॥ लोचन अभिरामा तनु घनस्यामा निज आयुध भुजचारी। भूषन बनमाला नयन बिसाला सोभासिंधु खरारी॥1॥ भावार्थ:-दीनों पर दया करने वाले, कौसल्याजी के हितकारी कृपालु प्रभु प्रकट हुए। मुनियों के मन को हरने वाले उनके अद्भुत रूप का विचार करके माता हर्ष से भर गई। नेत्रों को आनंद देने वाला मेघ के समान श्याम शरीर था, चारों भुजाओं में अपने (खास) आयुध (धारण किए हुए) थे, (दिव्य) आभूषण और वनमाला पहने थे, बड़े-बड़े नेत्र थे। इस प्रकार शोभा के समुद्र तथा खर राक्षस को मारने वाले भगवान प्रकट हुए॥1॥ * कह दुइ कर जोरी अस्तुति तोरी केहि बिधि करौं अनंता। माया गुन ग्यानातीत अमाना बेद पुरान भनंता॥ करुना सुख सागर सब गुन आगर जेहि गावहिं श्रुति संता। सो मम हित लागी जन अनुरागी भयउ प्रगट श्रीकंता॥2॥ भावार्थ:-दोनों हाथ जोड़कर माता कहने लगी- हे अ...

जय राम सदा सुखधाम हरे

जय राम सदा सुखधाम हरे। रघुनायक सायक चाप धरे।। भव बारन दारन सिंह प्रभो। गुन सागर नागर नाथ बिभो।।1।। तन काम अनेक अनूप छबी। गुन गावत सिद्ध मुनींद्र कबी।। जसु पावन रावन नाग महा। खगनाथ जथा करि कोप गहा।।2।। जन रंजन भंजन सोक भयं। गतक्रोध सदा प्रभु बोधमयं।। अवतार उदार अपार गुनं। महि भार बिभंजन ग्यानघनं।।3।। अज ब्यापकमेकमनादि सदा। करुनाकर राम नमामि मुदा।। रघुबंस बिभूषन दूषन हा। कृत भूप बिभीषन दीन रहा।।4।। गुन ग्यान निधान अमान अजं। नित राम नमामि बिभुं बिरजं।। भुजदंड प्रचंड प्रताप बलं। खल बृंद निकंद महा कुसलं।।5।। बिनु कारन दीन दयाल हितं। छबि धाम नमामि रमा सहितं।। भव तारन कारन काज परं। मन संभव दारुन दोष हरं।।6।। सर चाप मनोहर त्रोन धरं। जरजारुन लोचन भूपबरं।। सुख मंदिर सुंदर श्रीरमनं। मद मार मुधा ममता समनं।।7।। अनवद्य अखंड न गोचर गो। सबरूप सदा सब होइ न गो।। इति बेद बदंति न दंतकथा। रबि आतप भिन्नमभिन्न जथा।।8।। कृतकृत्य बिभो सब बानर ए। निरखंति तवानन सादर ए।। धिग जीवन देव सरीर हरे। तव भक्ति बिना भव भूलि परे।।9।। अब दीन दयाल दया करिऐ। मति मोरि बिभेदकरी हरिऐ।। जेहि ते बिपरीत क्रिया करिऐ। दुख सो सुख मानि...

वर्णसङ्करकारक

प्रश्न = अंतर जातीय विवाह करने से क्या दुर्गति होती है ?  देखिए आज कल हिन्दुओ का क्या हाल है कि ग्रँथों को मानेंगे लेकिन ग्रँथों की नही मानेंगे।। सरकार भी अंतर जातीय विवाह के लिए फंडिंग देती है और बड़े बड़े हिन्दू संगठन @VHPDigital  @RSSorg अंतर जातीय विवाह को समर्थन करते है । https://t.co/21G1HlsKl0 आइए देखते है कि भगवत गीता क्या कहती है अंतर जातीय विवाह करने से क्या दुर्गती होती है। कुलक्षये प्रणश्यन्ति कुलधर्माः सनातनाः । धमें नष्टे कुलं कृत्स्नमधर्मोऽभिभवत्युत ॥  अर्थात = कुलके नाशसे सनातन कुल - धर्म नष्ट हो जाते हैं , धर्मके नाश हो जानेपर सम्पूर्ण कुलमें पाप भी बहुत फैल जाता है  अधर्माभिभवात्कृष्ण प्रदुष्यन्ति कुलस्त्रियः । स्त्रीषु दुष्टासु वार्ष्णेय जायते वर्णसङ्करः ॥ अर्थात = हे कृष्ण ! पापके अधिक बढ़ जानेसे कुलकी स्त्रियाँ अत्यन्त दूषित हो जाती हैं और हे वार्ष्णेय ! स्त्रियोंके दूषित हो जानेपर वर्णसङ्कर उत्पन्न होता है ॥ https://t.co/aL7T7UCIC7 सङ्करो नरकायैव कुलघ्नानां कुलस्य पतन्ति पितरो ह्येषां लुप्तपिण्डोदकक्रियाः ॥ अर्थात = वर्णसङ्कर कुलघातियोंको और कुल...

स्कन्दपुराण

४/६ (स्कन्दपुराण ब्राह्मखण्ड चातुर्मास्यमाहत्म्य) भगवान् शंकर - पार्वती! भगवान् विष्णुके सहस्रनामोंमें जो सारभूत नाम है, मैं उसीका नित्य-निरंतर चिन्तन करता हूं।मैं राम नाम जपता हूँ और उसीके अंककी मालाके द्वारा गिनती करता हूँ।राम-नाम कोटि मन्त्रोंसे अधिक फल देनेवाला है।५/६ 'राम' इस दो अक्षरके नामका जप सब पापोंका नाश करनेवाला है। मनुष्य चलते, खड़े होते और सोते समय भी श्रीराम-नामका कीर्तन करनेसे इह लोकमें सुख पाता है और अन्तमें भगवान्‌का पार्षद होता है। इस भूमितलपर राम-नामसे बढ़कर कोई पाठ नहीं है। ६/६ जो राम-नामकी शरण ले चुके हैं, उन्हें कभी यमलोककी यातना नहीं भोगनी पड़ती।जो-जो विघ्नकारक दोष हैं, सब राम-नामका उच्चारण करनेमात्रसे नष्ट हो जाते हैं। 'राम' यह मन्त्रराज भय तथा व्याधियोंका नाश करनेवाला है, युद्धमें विजय देनेवाला तथा समस्त कार्यों एवं मनोरथोंका सिद्ध करनेवाला है। १/६ भक्तवाञ्छा- कल्पतरु भगवान् श्रीहरिको अपने भक्त अतिशय प्रिय हैं। अतएव भगवान्‌के नाते ही उनके प्यारे भक्त प्रात:स्मरणीय और नित्य वन्दनीय हैं।  २/६ 'भगतिवंत अति नीचउ प्रानी। मोहि प्रानप्रिय असि मम ब...

mrityunjay yog

Sab me Bhagwan ko dekhe MN me pranam kre 

astrology

https://youtu.be/WrG7MUehdbg Sankari nokari Vala vedio Dhan Vala vedio  https://youtu.be/sKMxOvqvPOk Main khana  Pahla chotha satva 12 If sit sury. Guru. Mangle then profit 

दोहावली

तुलसी हठि हठि कहत नित चित सुनि हित करि मानि। लाभ राम सुमिरन बड़ो बड़ी बिसारें हानि।21। बिगरी जनम अनेक की सुधरै अबहीं आजु। होहि राम को नाम जपु तुलसी तजि कुसमाजु।22। प्रीति प्रतीति सुरीति सों राम राम जपु राम। तुलसी तेरो है भलेा आदि मध्य परिनाम।23। दंपति रस दसन परिजन बदन सुगेह। तुलसी हर हित बरन सिसु संपति सहज सनेह।24।   बरषा रितु रघुपति भगति तुलसी सालि सुदास। रामनाम बर बरन जुग सावन भादव मास।25। राम नाम नर केसरी कनककसिपु कलिकाल। जापक जन प्रहलाद जिमि पालिहि दलि सुरसाल।26। राम नाम किल कामतरू राम भगति सुरधेनु। सकल सुमंगल मूल जग गुरूपद पंकज रेनु।27। राम नाम कलि कामतरू सकल सुमंगल कंद। सुमिरत करतल सिद्धि सब पग पग परमानंद।28।  जथा भूमि सब बीजमय नखत निवास अकास।  रामनाम सब धरममय जानत तुलसीदास।29। सकल कामना हीन जे राम भगति रस लीन। नाम सुप्रेम पियुष हद तिन्हहुँ किए मन मीन।30। बिगरी जनम अनेक की सुधरै अबहीं आजु। तुलसीदासजी महाराज कहते हैं‒‘बिगरी जनम अनेक की सुधरै अबहीं आजु’   अनेक जन्मोंकी बिगड़ी हुई बात ,  आज सुधर जाय और आज भी अभी-अभी इसी क्षण ,  देरीका काम नहीं ,  क्य...

विनयपत्रिका

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इस मूर्ख मनने मुझको खूब ही छकाया। हे करुणामय! सुनिये, इसीके कारण मैं बारंबार जगत्में जनम-जनमकर दुःखसे रोता फिरा।शीतल और मधुर अमृतरूप सहजसुख  जो अत्यन्त निकट ही रहता है, मैंने इस मनके फेरमें पड़कर उसे यों भुला दिया, मानो वह बहुत ही दूर हो। मोहवश अनेक प्रकारसे परिश्रम कर मुझ मुर्खने व्यर्थ ही पानीको बिलोया। यद्यपि मनमें यह जानता था कि कर्म कीचड़ है, फिर भी चित्तको उसीमें सानकर मैं कुटिल, मलसे ही मलको धोना चाहता हूँ। प्यास लग रही है, पर मैं ऐसा दुष्ट हूँ कि गंगाजीको छोड़कर बार-बार व्याकुल हो आकाश निचोड़ता फिरता हूँ। https://t.co/UnF01WZZYm #तुलसीदास #विनयपत्रिका