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Showing posts from June, 2024

वैदिक ज्योतिष शास्त्र में वास्तुदोष

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वैदिक ज्योतिष शास्त्र में वास्तुदोष तथा वास्तु संबंधी नियमों का विशेष महत्व होता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में यदि वास्तु संबंधी कोई भी दोष होता है तो इसका नकारात्मक प्रभाव व्यक्ति के जीवन पर जरूर पड़ता है, उस घर में सुख और शांति का हमेशा अभाव बना रहता है। 

योग दिवस

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निन्दाप्रशंसे चात्यर्थं न वदन्ति परस्य ये। न च निन्दाप्रशंसाभ्या विक्रियन्त कदाचन।। योगी अन्य लोगों की निन्दा-प्रशंसा के रूप में बातचीत नहीं करते हैं और न अन्य लोगों द्वारा की गई निन्दा-प्रशंसा से उनके मन कभी प्रभावित ही होते हैं। युक्ताहारविहारस्य युक्तचेष्टस्य कर्मसु। युक्तस्वप्नावबोधस्य योगो भवति दुःखहा।। (श्रीमद्भगवद्गीता६.१७) उचित आहार विहार करने वाले के लिए,,उचित क्रियाकलाप करने वाले के लिए,,उचित जागरण एवं शयन करने वाले के लिए योग समस्त शारीरिक मानसिक आध्यात्मिक दु:खों को नष्ट कर देता है योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः ॥२॥ - योगसूत्रम् (पतञ्जलिः) Yoga is restraining the mind (Chitta) from taking various forms (Vrittis). There are 196 Yoga Sutras given by Patanjali, divided into four chapters: समाधि - 51 सूत्र साधन - 55 सूत्र विभूति - 56 सूत्र कैवल्य - 34 सूत्र

विष्णु जी के कल्याणकारी 28 नाम

विष्णु जी के कल्याणकारी 28 नाम अर्जुन उवाच किं नु नाम सहस्त्राणि जपते च पुनः पुनः ।  यानि नामानि दिव्यानि तानि चाचक्ष्व केशव ।। श्री भगवान उवाच मत्स्यम् कूर्म वराहं च वामनं च जनार्दनम् ।  गोविन्दं पुण्डरीकाक्षं माधवं मधुसूदनम् ।।   पद्मनाभं सहस्त्राक्षं वनामालिं हलायुधम् । गोवर्धनं हृषीकेशं वैकुण्ठं पुरुषोत्तमम् ।।  विश्वरूपं वासुदेवं रामं नारायणं हरिम् । दामोदरं श्रीधरं च वेदाङ्ग गरुडध्वजम् ।। अनन्तं कृष्णगोपालं जपतो नास्ति पातकम् ।  गवां कोटिप्रदानस्य अश्वमेधशतस्य च ।।  कन्यादानसहस्त्राणां फलं प्राप्नोति मानवः ।  अमायां वा पौर्णमास्यामेकादश्यां तथैव च ।। सन्ध्याकाले स्मरेन्नित्यं प्रातः काले तथैव च।  मध्याह्न च जपन्नित्यं सर्वपापैः प्रमुच्यते ।।  ।।इति श्रीकृष्णार्जुनसंवादे श्रीविष्णोरष्टाविंशतिनामस्तोत्रं सम्पूर्णम्।। श्री भगवान बोले- अर्जुन ! मत्स्य, कूर्म, वराह, वामन, जनार्दन, गोविन्द, पुण्रीकाक्ष, माधव, मधुसूदन, पद्मनाभ, सहस्त्राक्ष, वनमाली, हलायुध, गोवर्धन, हृषीकेश, वैकुण्ठ, पुरुषोत्तम, विश्वरूप, वासुदेव, राम, नारायण, हरि, दामोदर,...

त्रयोदशाक्षर मन्त्र विजयमन्त्र 'मन्त्रराज' कहा जाता है।

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श्रीरामेति पदं चोक्त्वा जय राम ततः परम् । जय द्वयं वदेत् प्राज्ञो रामेति मन्त्रराजकः ॥ अर्थात् 'श्रीराम' कहने के बाद 'जय राम' कहना चाहिये। तत्पश्चात् दो बार 'जय-जय' बोलकर 'राम' बोलना चाहिये। यही त्रयोदशाक्षर मन्त्र विजयमन्त्र 'मन्त्रराज' कहा जाता है।

ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्मये नमः

इसे सुनें ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्मयै नम:॥ ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्मये नमः॥  महालक्ष्मी का यह मंत्र धन, समृद्धि और प्रचुरता के लिए एक बीज मंत्र है।   नकारात्मकता और गरीबी को दूर करता है । https://youtu.be/Q_cvHbqxbxk?si=42L6DS1flQV0U2Fv https://hindi.webdunia.com/navratri-special/navratri-chamunda-mantra-116100200025_1.html

रसोई ,रंग और सौचालय ये मुख्य वास्तु दोष है

opposit side वाले को नही use करना