श्रीमद्भागवतमाहात्म्यम्
🌹🌹श्रीमद्भागवतमाहात्म्यम् ' 🌹🌹 शृण्वतां स्वकथां कृष्ण : पुण्यश्रवणकीर्तनः । हृद्यन्त : स्थो ह्यभद्राणि विधुनोति सुहृत्सताम् ॥ अर्थात = भगवान् श्रीकृष्णके यशका श्रवण और कीर्तन दोनों पवित्र करनेवाले हैं । वे अपनी कथा सुननेवालोंके हृदयमें आकर स्थित हो जाते हैं !और उनकी अशुभ वासनाओंको नष्ट कर देते हैं , क्योंकि वे संतोंके नित्य सुहृद् हैं ॥ ॐ नमो नारायण ॐ नमो भगवते वासुदेवाय🌹 दिएँ पीठि पाछें लगै सनमुख होत पराइ । तुलसी संपति छाँह ज्यों लखि दिन बैठि गँवाइ ॥ - ॐ भावार्थ - तुलसीदासजी कहते हैं कि सम्पत्ति शरीरकी छायाके समान है । इसको पीठ देकर चलनेसे यह पीछे - पीछे चलती है और सामने होकर चलनेसे दूर भाग जाती है । जो धनसे मुँह मोड़ लेता है , धनकी नदी उसके पीछे - पीछे बहती चली आती है और जो धनके लिये सदा ललचाता रहता है , उसे सपनेमें भी पैसा नहीं मिलता । इस बातको समझकर घर बैठकर ही दिन बिताओ ( अर्थात् संतोषसे रहो और भगवान् का भजन करो ) ॥ २५७ ॥ नमो नारायण ॐ नमो भगवते वासुदेवाय🌹