राम नाम के अमृत का अमृतपान करने से मनुष्यों को प्रारब्धजन्य कष्ट भी कट जाते हैं।
रामाय रामभद्राय रामचन्द्राय वेधसे।रघुनाथाय नाथाय सीताया: पतये नम:॥ राम नाम के अमृत का अमृतपान करने से मनुष्यों को प्रारब्धजन्य कष्ट भी कट जाते हैं। श्री रामचरित मानस में वर्णित है:-मंत्र महामणी विषय व्याल के, मेटत कठिन कुअंक भाल के अर्थात् राम नाम एक महामणि है। यह राम नाम विषय रूपी विष को शम करके प्रारब्ध के असहनीय कष्ट को सहनीय बनाकर साधक को राम नाम में प्रवृत करता है। प्रारब्ध में विधाता द्वारा माथे पर जो कुअंक लिख दिए गए हैं वे कुअंक राम नाम के जाप में मिट जाते हैं। राम सकल स्वरूप है। सारा संसार राम ही तो है। राम जी के बारे में कथन करना, तर्क करना सब मिथ्या है। क्योंकि राम जी हर जगह विराजमान हैं साधु संताें का तो एक ही कथन है कि राम नाम जपने से आत्मिक तथा मानसिक विश्वास बढ़ता है। यदि मनुष्य राम नाम नित्यकर्म में जप करके तो देखे तो उसे स्वयं ही राम के दर्शन हो जाए राम नाम कलियुग में सब मनोरथों को पूर्ण करने वाली कामधेनु गाय है और सानों के लिए संजीवनी बूटी है। इस धरा पर रामायण यानि राम कथा ही अमृत की नदी है। यह ही जन्म मरणरूपी भय का नाश करने वाली और भ्रम रूपी मेढ़कों को खाने के लिए सर...