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Showing posts from March, 2023

राम नाम के अमृत का अमृतपान करने से मनुष्यों को प्रारब्धजन्य कष्ट भी कट जाते हैं।

रामाय रामभद्राय रामचन्द्राय वेधसे।रघुनाथाय नाथाय सीताया: पतये नम:॥ राम नाम के अमृत का अमृतपान करने से मनुष्यों को प्रारब्धजन्य कष्ट भी कट जाते हैं। श्री रामचरित मानस में वर्णित है:-मंत्र महामणी विषय व्याल के, मेटत कठिन कुअंक भाल के अर्थात् राम नाम एक महामणि है। यह राम नाम विषय रूपी विष को शम करके प्रारब्ध के असहनीय कष्ट को सहनीय बनाकर साधक को राम नाम में प्रवृत करता है। प्रारब्ध में विधाता द्वारा माथे पर जो कुअंक लिख दिए गए हैं वे कुअंक राम नाम के जाप में मिट जाते हैं। राम सकल स्वरूप है। सारा संसार राम ही तो है। राम जी के बारे में कथन करना, तर्क करना सब मिथ्या है। क्योंकि राम जी हर जगह विराजमान हैं साधु संताें का तो एक ही कथन है कि राम नाम जपने से आत्मिक तथा मानसिक विश्वास बढ़ता है। यदि मनुष्य राम नाम नित्यकर्म में जप करके तो देखे तो उसे स्वयं ही राम के दर्शन हो जाए राम नाम कलियुग में सब मनोरथों को पूर्ण करने वाली कामधेनु गाय है और सानों के लिए संजीवनी बूटी है। इस धरा पर रामायण यानि राम कथा ही अमृत की नदी है। यह ही जन्म मरणरूपी भय का नाश करने वाली और भ्रम रूपी मेढ़कों को खाने के लिए सर...

संध्या वंदन क्यूँ करे?

संध्या वंदन क्यूँ करे? ऋषयो दीर्घ सन्ध्यवाद् दीर्घमायुरवाप्नुयुः। प्रज्ञां यशश्च कीर्तिश्च ब्रह्मवर्चसमेव च #thread स्नान के पश्चात् सन्ध्यावन्दनादि का क्रम शास्त्रों में कहा गया है यह नित्य क्रिया है । इससे बड़ा लाभ है। रात्रि या दिन में जो भी अज्ञानकृत पाप होता है वह सन्ध्या के द्वारा नष्ट हो जाता है तथा अन्त:करण निर्मल, शुद्ध और पवित्र हो जाता है । सन्ध्या से दीर्घ आयु, प्रज्ञा, यश, कीर्ति तथा ब्रह्मतेज की प्राप्ति होती है । ॥ इस प्रकार हम शारीरिक शक्ति, बुद्धिबल, ब्रह्मतेज तथा यश की प्राप्ति भी इसके द्वारा होती है। नित्य सन्ध्या करने से ध्यान द्वारा हम परमात्मा से सम्पर्क स्थापित करते हैं। सन्ध्या में आचमन, मार्जन, प्राणायाम, अधमर्षण, उपस्थान आदि छाप में बड़ा रहस्य छिपा हुआ है और बड़े लाभ निहित हैं।परस्थ प्राणायाम के द्वारा रोग और पाप का नाश होता है। सन्ध्या द्वारा हमें, शारीरिक शुद्धि, मानसिक शुद्धता और बौद्धिक प्रखरता और ब्रह्मवर्चस के साथ आध्यात्मिक शक्ति की प्राप्ति होती है। सन्ध्या के बाद गायत्री जप का विधान है। इससे बुद्धि को प्रेरणा मिलती है। गायत्री वेदमाता है, यह बुद्धि को...

माँ सिद्धिदात्री का स्तोत्र पाठ-

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माँ सिद्धिदात्री का स्तोत्र पाठ- कंचनाभा शखचक्रगदा पद्मधरा मुकुटोज्वलो। स्मेरमुखी शिवपत्नी सिध्दिदात्री नमोअस्तुते॥ पटाम्बर परिधानां नानालंकारं भूषिता। नलिस्थितां नलनार्क्षी सिद्धीदात्री नमोअस्तुते॥ परमानंदमयी देवी परब्रह्म परमात्मा। परमशक्ति,परमभक्ति, सिध्दिदात्री नमोअस्तुते॥

भवन निर्माण करते समय भूमि का ढाल

वास्तु शास्त्र में बताया गया है कि मकान या दुकान का निर्माण करते समय प्रत्येत व्यक्ति को वास्तु शास्त्र के नियमों का ध्यान रखना चाहिए। इसके लिए किसी भी वास्तु व ज्योतिष शास्त्री से सलाह ली जा सकती है, क्योंकि कहा जाता है जो घर या दुकान वास्तु शास्त्र के अनुरूप नहीं बनाया जाता है। वो कभी उसके मुखिया व अन्य रहने वाले लोगों के लिए शुभ नहीं माना जाता है। जी हां, वास्तु विशेषज्ञ बताते हैं ऐसे में जीवन में नकारात्मकता हावी होने लगती है जिससे घर के सदस्यों को धन संबंधी जैसे कई अन्य परेशानियां का सामना करन पड़ता है। इसके अलावा घर में परिवार के सदस्यों के बीच आपसी मतभेद होने लगते हैं। तो आइए जानते हैं कि भवन निर्माण करते समय भूमि का ढाल किसी दिशा में होना चाहिए, व इसका कैसा प्रभाव होता है।  वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार भूमि का ढाल पूर्व, उत्तर और ईशान दिशा में सब तरह से लाभप्रद ही साबित होता है।  इसके लिए उत्तर दिशा भी काफी शुभ मानी जाती है। कहा जाता है इस दिशा में भूमि का ढाल होने से सेहत संबंधी लाभ प्राप्त होेते हैं तथा जीवन में धन-धान्य की कमी नहीं आती।  बताया जाता है कि पूर्व द...

yog

[27/03, 8:13 AM] Viru Singh: योगोऽपि ज्ञानहीनस्तु,न क्षमो मोक्षकर्मणि। तस्मज्ज्ञानञ्च योगञ्च,मुमुक्षुर्दृढमन्यसेत्॥(योगतत्वोपनिषद-१५) -ज्ञानरहित योगसे मोक्षप्राप्त नहीं होसकता अतःमुमुक्षु कोज्ञान व योग दोनोंका दृढ़ अभ्यास करनाचाहिए(सूक्ति सिंधू) [27/03, 8:13 AM] Viru Singh: Salvation cannot be achieved by yoga without knowledge, so a person should practice both knowledge and yoga with determination

द्वादश एतानि नामानि लक्ष्मी संपूज्यय पठेत

बारह मंत्र इसप्रकार हैं –* 🌷 *ॐ ऐश्‍वर्यै नम:* 🌷 *ॐ कमलायै नम:* 🌷 *ॐ लक्ष्मयै नम:* 🌷 *ॐ चलायै नम:* 🌷 *ॐ भुत्यै नम:* 🌷 *ॐ हरिप्रियायै नम:*  🌷 *ॐ पद्मायै नम:*  🌷 *ॐ पद्माल्यायै नम:*  🌷 *ॐ संपत्यै नम:* 🌷 *ॐ ऊच्चयै नम:* 🌷 *ॐ श्रीयै नम:* 🌷 *ॐ पद्मधारिन्यै नम:*... *सिद्धिबुद्धिप्रदे देवि भुक्तिमुक्ति प्रदायिनि |  मंत्रपूर्ते सदा देवि महालक्ष्मी नमोस्तुते ||* 👉🏻 *द्वादश एतानि नामानि लक्ष्मी संपूज्यय पठेत | स्थिरा लक्ष्मीर्भवेतस्य पुत्रदाराबिभिस: ||* 🙏🏻 *उसके घर में लक्ष्मी स्थिर हो जाती है |  जो इन बारह नामों को इन दिनों में पठन करें |*

moksha line

https://youtube.com/shorts/aPbzgDTC8Lk?feature=share Ketu line from when life line end 

bhagvat prapti ke sadhan

https://youtu.be/3Q3IWZ-PqXM

हनुमान द्वादशनाम स्तोत्र

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हनुमान द्वादशनाम स्तोत्र ~ Remedies ~ ये चमत्कारिक पाठ संकट के समय संकटमोचक की तरह काम करता है। 

naam jap vidhi

https://youtu.be/sQ5vhxkZwDA

महालक्ष्मीचतुर्विंशतिनामस्तोत्रम्

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|| महालक्ष्मीचतुर्विंशतिनामस्तोत्रम् ||🙏 सुरक्तपद्मपत्राभकरपादतले शुभे। सरत्नाङ्गदकेयूरकाङ्चीनूपुरशोभिते॥ यक्षकर्दमसंलिप्तसर्वाङ्गे कटकोज्ज्वले। माङ्गल्याभरणैश्चित्रैर्मुक्ताहारैर्विभूषिते॥ ताटङ्कैरवतंसैश्च शोभमानमुखाम्बुजे। पद्महस्ते नमस्तुभ्यं प्रसीद हरिवल्लभे॥  माँ लक्ष्मी

leg exercise

https://youtu.be/Ok4yrHFcrb8

वशिष्ठ संहिता

रामस्य नाम रूपं च लीला धाम परात्परम् । एतच्चतुष्टयं नित्यं सच्चिदानन्दविग्रहम् ।।                                      (वशिष्ठ संहिता) भगवान राम का नाम,रूप,लीला और राम का धाम ये चारों नित्य सच्चिदानन्द-स्वरूप हैं । इसलिए  नाम जप, नाम स्मरण, नाम चिंतन की अत्यंत महिमा कही गयी है।

Mukti

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khadi rekhaye on hand

https://youtu.be/9mEi7DY91tg Adhayatmik guru  Electronic business  Bhupati 

kabir

https://youtu.be/XeY6YOAQwMs

yog

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https://youtu.be/2MhG-vhGMKU पवनमुक्तासन  जानिए करने का तरीका फायदे और सावधानियां - https://www.mensxp.com/hindi/yoga/asanas/52891-how-to-do-pawanmuktasana-and-what-are-its-benefits-in-hindi.html?utm_source=share&utm_medium=web_wh

दोहवाली

सगुन ध्यान रुचि सरस नहिं निर्गुन मन ते दूरि। तुलसी सुमिरहु रामको नाम सजीवन मूरि॥ - दोहवाली सगुणरूप के ध्यान में तो प्रीतियुक्त रुचि नहीं है और निर्गुण मन से दूर है, समझ में नहीं आता। तुलसीदास महाराज कहते हैं कि ऐसी दशा में रामनाम-स्मरणरूपी संजीवनी बूटी का सदा सेवन करना चाहिए। जानि राम सेवा सरस समुझि करब अनुमान। पुरुषा ते सेवक भए हर ते भे हनुमान॥ श्रीरामजी की सेवा में परम आनन्द जानकर पितामह ब्रह्माजी सेवक (जाम्बवान्) बन गये और श्रीशिवजी हनुमान् जी हो गये। इस रहस्यको समझो और उनके प्रेम की महिमा का अनुमान लगाओ ॥ (दो.१४३)

ichha Ka tyag and kartav palan

https://youtu.be/vIbtM6R3e0Q

Bhagwan ko prapt kerna asan he

https://youtu.be/yMdNXvHbUPc Ram jap se anubhuti hogi but not show 

seva Ka mahatv

https://youtu.be/K7RBRrdd2vs